बैंक ऑफ इंडिया पर आरबीआई ने लगाया आर्थिक जुर्माना

 

 

जमा पर ब्याज दर, बैंकों में ग्राहक सेवा, अग्रिम पर ब्याज दर, बड़े क्रेडिट पर सूचना का केंद्रीय भंडार (सीआरआईएलसी) – रिपोर्टिंग में संशोधन और सदस्यता पर आरबीआई द्वारा जारी कुछ निर्देशों का अनुपालन क्रेडिट सूचना कंपनियों (सीआईसी) और क्रेडिट सूचना कंपनी नियम, 2006 (सीएलसी नियम) के प्रावधानों का उल्लंघन किया। जिसके सापेक्ष में भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंक ऑफ इंडिया (बैंक) पर 1,40,76,000 रुपये (केवल एक करोड़ चालीस लाख छिहत्तर हजार रुपये) का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। यें जानकारियां भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक योगेश दयाल ने जारी एक बयान में दी।

उन्होंने बताया कि बैंक के पर्यवेक्षी मूल्यांकन के लिए वैधानिक निरीक्षण आरबीआई द्वारा 31 मार्च, 2021 (आईएसई 2021) और 31 मार्च, 2022 (आईएसई 2022) की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया गया था। नियामक निर्देशों/वैधानिक प्रावधानों और उस संबंध में संबंधित पत्राचार के गैर-अनुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था जिसमें उसे कारण बताने की सलाह दी गई थी कि अनुपालन में विफलता के लिए उस पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए। निर्देश। नोटिस पर बैंक के जवाब पर विचार करने, व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक दलीलों और उसके द्वारा की गई अतिरिक्त दलीलों की जांच करने के बाद, आरबीआई ने अन्य बातों के साथ-साथ पाया कि बैंक के खिलाफ निम्नलिखित आरोप लगाए गए थे, जिससे मौद्रिक जुर्माना लगाया जाना जरूरी था।
बैंक ने प) पहले से बताई गई ब्याज दरों की अनुसूची के अनुसार कुछ सावधि जमा खातों में ब्याज का भुगतान नहीं किया।
(पप) ग्राहकों से अमान्य मोबाइल नंबरों के आधार पर एसएमएस अलर्ट शुल्क लगाया गया था, न कि वास्तविक उपयोग के आधार पर लगाया था।
(पपप) निर्धारित आवधिकता पर एमसीएलआर और बाहरी बेंचमार्क से जुड़े अग्रिमों में ब्याज दरों को रीसेट करने में बीओआई विफल रहा।

(पअ) बीओआई कुछ फ्लोटिंग रेट खुदरा ऋणों और एमएसएमई को फ्लोटिंग रेट ऋणों पर ब्याज को बाहरी बेंचमार्क दर पर बेंचमार्क करने में विफल रहा;
(अ) सीआरआईएलसी को कुछ बड़े उधारकर्ताओं से संबंधित डेटा रिपोर्ट करने में विफल या गलत तरीके से रिपोर्ट किया गया और
(अप) क्रेडिट सूचना कंपनियों (सीआईसी) को सटीक जानकारी प्रस्तुत करने में विफल रहा।

यह कार्रवाई विनियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता को प्रभावित करना नहीं है। इसके अलावा, मौद्रिक जुर्माना लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के खिलाफ शुरू की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

यें जानकारियां भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक योगेश दयाल ने जारी एक बयान में दी।

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