पेंशनों को लेकर जो भ्रांतियां या गलतफहमियां यूनियन के नेताओं द्वारा फैलाई गई हैं वह सरासर बेबुनियाद है-उ0प्र0 वित्त मंत्री

प्रेदश की आमदनी का 50 फीसदी पेंशन, ब्याज और वेतन के मदों में जाता है-वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना

पेंशन निदेशालय के नए भवन का वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने किया शुभारंभ

कर्मियों और ट्रेजरी को निर्देश, बुजुर्गों की सेवा को समझें कर्तव्य, समस्याओं के निस्तारण में न हो कोई गलती

पूजा श्रीवास्तव


उत्तर प्रदेश के बजट का एक बड़ा हिस्सा सिर्फ पेंशन खाते में जाता है वहीं 12 फ़ीसदी पेंशन, ब्याज और वेतन के मदों में 50 फीसदी से ज्यादा का हिस्सा जाता है। मौजूदा वक्त में 11 लाख 80 हजार से ज्यादा लोगों को ₹52000 करोड़ से ज्यादा की रकम पंेशन में दी जा रही है। यें बातें वित्तीय प्रबंध प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान परिसर में पेंशन निदेशालय के नवीन भवन का उद्घाटन करते हुए उत्तर प्रदेश के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इंदिरा नगर लखनऊ में कही।

एक सवाल के जवाब में सुरेश कुमार खन्ना ने कहा कि 2004 या 2019 की पेंशनों को लेकर जो भ्रांतियां या गलतफहमियां यूनियन के नेताओं द्वारा फैलाई गई हैं वह सरासर बेबुनियाद है क्योंकि पेंशन का 85 फीसदी पैसा हम सरकारी बॉन्ड में लगाते हैं और 15 परसेंट मार्केट में लगाने के बाद हमें अच्छे रिर्टन मिल रहे है जोकि तय रकम से ज्यादा दिया जा रहा है।

उन्होंने निदेशालय में कार्यरत कर्मियों को संबोधित करते हुए कहा कि हमें बुजुर्गों की सेवा का अवसर मिला है। ये पेंशनर्स हमारे बीच के ही लोग हैं। उनकी सेवा करना आपका कर्तव्य है।
वित्त मंत्री ने सभी ट्रेजरी को संबोधित करते हुए कहा कि हमें ऐसा मैकैनिज्म बनाना होगा कि पेंशनर्स या उनके आश्रितों को दी जाने वाली पेंशन में किसी तरह की त्रुटि न हो। उन्हें निर्धारित राशि समय पर मिले, इसकी व्यवस्था करनी होगी। इसके गलत निस्तारण पर बाद में रिकवरी जैसी चीजों से हमें बचना होगा।

 

 

वित्त मंत्री ने कहा कि आवश्यक पत्रावलियों / अभिलेखों के अभिरक्षण हेतु इन्दिरा भवन में स्थापित पेंशन निदेशालय में पर्याप्त स्थान उपलब्ध न होने के कारण अपेक्षाकृत एक वृहद् स्थान की आवश्यकता काफी समय से महसूस की जाती रही थी। इसी क्रम में वितीय प्रबंध प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान, उत्तर प्रदेश के भूखण्ड संख्या -24/3 स्थित प्रशासनिक भवन को पेंशन निदेशालय को आवंटित किया गया ।
राज्य सरकार अपने सेवानिवृत कार्मिकों को अनुमन्य सेवानिवृत्तिक लाभ जैसे पेंशन, ग्रेच्युटी राशिकरण सहित अन्य देयकों का भुगतान समय से दिलाये जाने हेतु कृत संकल्प है। पेंशनर्स के जीवन की संध्या को उर्जावान और गतिमान बनाए रखने के लिए सरकार द्वारा अनेक प्रयास किये गए हैं, जिसके फलस्वरूप पेंशनर्स को स्थानीय स्तर पर सुगमतापूर्वक और निर्वाध भुगतान प्राप्त हो, यह सुनिश्चित करने का प्रयास सतत किया जा रहा है। इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु पेंशन स्वीकृति की केंद्रीयकृत व्यवस्था के स्थान पर मण्डल स्तर पर पेंशन स्वीकृति की विकेन्द्रीकृत व्यवस्था प्रदेश में लागू की गयी ।
पेंशन भुगतानादेश जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक सुगम एवं प्रभावी बनाए जाने हेतु पेंशन स्वीकृति से लेकर पेंशन भुगतान की व्यवस्था को पूर्णतया ऑनलाइन कर दिया गया है ।
इस प्रणाली में पेंशन स्वीकृति की सूचना पेंशनर को ईमेल एवं मोबाइल द्वारा प्रदान किये जाने की व्यवस्था है।
ज्ञातव्य है कि अभी तक यह निदेशालय इंदिरा भवन के आठवें तल पर क्रियाशील था, लेकिन आवश्यक पत्रावलियों, अभिलेखों के अभिरक्षण के लिए पर्याप्त स्थान न होने के कारण इसे वित्तीय प्रबंध प्रशिक्षण एवं शोध संस्थान परिसर में स्थानांतरित किया गया है। इस प्रशासनिक भवन का जीर्णोद्धार लोक निर्माण विभाग द्वारा एक करोड़ की लागत से कराया गया है। वर्तमान में समूह क श्रेणी के अधिकारियों, विभिन्न आयोगों के सदस्यों एवं खादी बोर्ड सहित कृषि विश्वविद्यालयों एवं प्राविधिक कॉलेज के कार्मिकों की पेंशन प्रकरण का निस्तारण निदेशालय स्तर से किया जा रहा है। साथ ही राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली से आच्छादित कार्मिकों की सेवारत मृत्यु के प्रकरणों में इनके आश्रितों को उनके विकल्प के आधार पर पारिवारिक पेंशन भी स्वीकृत किए जाने की व्यवस्था है। वर्तमान समय में ई पेंशन सिस्टम के माध्यम से ऑनलाइन पेंशन प्राधिकार पत्र निर्गत करने की कार्यवाही की जा रही है।

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