उद्योग और सरकारी मशीनरी के बीच संवाद से हो समाधान-विजय पांडे

“FSSAI: भारतीय खाद्य सुरक्षा के अनुपालन एवं प्रवर्तन की चुनौती” विषय पर गोष्ठी

पूजा भट्ट

कानपुर, उत्तर प्रदेश –  मर्चेंट्स चैंबर ऑफ उत्तर प्रदेश की ट्रेड समिति एवं कानपुर होटल रेस्टोरेंट एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में “FSSAI: भारतीय खाद्य सुरक्षा के अनुपालन एवं प्रवर्तन की चुनौती” विषय पर एक महत्वपूर्ण गोष्ठी का आयोजन किया गया।

गोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रो. शमशेर, कुलपति, HBTU, कानपुर रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में  जितेन्द्र प्रताप सिंह, जिलाधिकारी, कानपुर नगर उपस्थित रहे।

विषय विशेषज्ञ के रूप में  संजय प्रताप सिंह, सहायक आयुक्त, FSSAI, ने विषय से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा की।

गोष्ठी में ज़ूम के माध्यम से राम मूर्ति जी ने भी भाग लिया। उन्होंने कहा कि यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि कानपुर में खाद्य उद्योग से जुड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करने और उद्यमियों को जागरूक करने की अत्यधिक आवश्यकता है।

इस अवसर पर  मितेष गांधी, तेल सलाहकार (नमकीन एवं स्नैक्स), फ्राइंग प्रोसेस एवं टीपीसी विशेषज्ञ ने “TPC / TPM” यानी टोटल पोलर कंपाउंड / टोटल पोलर मटेरियल की अवधारणा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने बताया कि तलने की प्रक्रिया में तेल के बार-बार प्रयोग से उसमें विभिन्न हानिकारक रासायनिक तत्व उत्पन्न होते हैं। ये तत्व तेल के तापमान, ऑक्सीजन, पानी, बर्तन की धातु एवं मसालों जैसे कारकों के कारण रासायनिक क्रियाओं (जैसे ऑक्सीकरण, फिशन, पॉलीमराइजेशन) के माध्यम से बनते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक हैं। TPC / TPM का स्तर यदि 25 से अधिक हो जाता है तो FSSAI के नियम अनुसार उस तेल का पुनः उपयोग वर्जित है। 01 जुलाई 2018 से लागू नियम के तहत, TPC / TPM 25 से अधिक होने पर वह तेल केवल अधिकृत बॉयोडीजल निर्माता या साबुन निर्माताओं को ही बेचा जा सकता है।

जिन इकाइयों में प्रतिदिन 40 लीटर या उससे अधिक तेल का उपयोग तलने के लिए होता है, उन्हें प्रतिदिन का TPC / TPM चार्ट मेंटेन करना अनिवार्य है।

तेल के काला या खराब होने के प्रमुख कारण:

• तेल में पानी, हल्दी, मिर्च एवं अन्य मसालों का उच्च तापमान पर मिलना।

• तलने के दौरान ‘साबुन’ जैसे चिकनाईदार पदार्थ का निर्माण, जो तेल को काला करता है।

• खाद्य पदार्थों के बार-बार जलने से भी तेल की गुणवत्ता में गिरावट आती है।

विषय विशेषज्ञ संजय प्रताप सिंह (सहायक आयुक्त, FSSAI) ने स्पष्ट रूप से कहा कि “जहां से भी गलत व अवैध खाद्य सामग्री का आयात कानपुर में हो रहा होगा, उसे सख्ती से रोका जाएगा।” उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि “सेक्टर वाइज मीटिंग्स” आयोजित की जाएंगी ताकि खाद्य सुरक्षा के नियमों को ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।

मुख्य अतिथि प्रो. शमशेर (कुलपति, HBTU) ने अपने संबोधन में कहा कि “निर्माण के प्रत्येक चरण में शुद्धता एवं गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।” उन्होंने इस बात पर बल दिया कि जानबूझकर कोई गलती न हो, इसके लिए इनपुट स्तर पर भी सतर्कता आवश्यक है। खराब या अस्वीकृत उत्पादों को नष्ट (डिमोलिश) करने की आवश्यकता को भी उन्होंने रेखांकित किया। अंत में उन्होंने “वसुधैव कुटुंबकम” का मूल मंत्र देते हुए सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना से कार्य करने की प्रेरणा दी।

जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने गोष्ठी के दौरान विजय पांडे को खाद्य सुरक्षा से संबंधित प्रशिक्षण देने की आवश्यकता दोहराई। उन्होंने बताया कि गोरखपुर में पूर्व में प्राप्त अनुभवों को कानपुर में भी लागू करने की योजना है।

उन्होंने कहा कि “कानपुर में उद्यमिता अत्यंत सशक्त है, इसे और अधिक संरचित करने की आवश्यकता है।” उन्होंने बाराबंकी में मैगी के सैंपल की जांच का उदाहरण देते हुए बताया कि खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की नियमित निगरानी आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि खाद्य सुरक्षा स्टाफ को स्वच्छता (हाइजीन) के प्रति जागरूक एवं प्रेरित किया जाना चाहिए।

अंत में उन्होंने सुझाव दिया कि “बैक किचन, खाद्य यौगिक (कंपाउंड), एवं संबंधित कार्यालयों में की जा रही कार्यवाही को सोशल मीडिया (जैसे कि ट्विटर) पर साझा किया जाए,” जिससे पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।

 

गोष्ठी के दौरान कानपुर के खाद्य व्यवसाय से जुड़े प्रतिष्ठित उद्योगपतियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित व्यक्तियों में सुरेंद्र गुप्ता (सह-संस्थापक, गोल्डी ग्रुप), जगदीश गुप्ता (निदेशक, मंटोरा ग्रुप), अश्विनी कोहली (सेंट्रल होटल, कानपुर), हरदीप सिंह मक्कड़ (होटल रॉयल क्लिफ, होटल ब्लिस एवं होटल एटर्निटी), तथा जीवन कुमार अग्रवाल (बनारसी मिष्ठान भंडार) शामिल थे।

कार्यक्रम का संचालन विजय पांडे, एडवाइजर, ट्रेड कमिटी द्वारा किया गया, तथा धन्यवाद प्रस्ताव, टीकम चंद सेठिया, चेयरमैन, ट्रेड कमिटी द्वारा प्रस्तुत किया गया।

 

इस अवसर पर चैंबर के प्रमुख सदस्य ईश्वर वर्मा, गीता गुप्ता, संदीप जैन, सहस्त्रांशु अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य उद्यमी एवं हितधारक उपस्थित रहे।

 

 

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