उद्यमियों व लाभार्थियों का सम्मान, खादी को राष्ट्रीय पहचान की नई बुलंदियों तक ले जाने का आह्वान – मंत्री राकेश सचान

 

खादी महोत्सव-2025 का भव्य शुभारंभ, ग्रामीण कारीगरों के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मिला नया आयाम

लखनऊ में 10 दिवसीय खादी महोत्सव, 160 से अधिक उद्यमियों के स्टॉल, हस्तशिल्प और स्वदेशी उद्योगों को मिलेगी नई उड़ान

स्वरोजगार व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का संकल्प, खादी उत्पादों की शानदार प्रदर्शनी शुरू

आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने हेतु खादी महोत्सव-2025 में नवाचार और परंपरा का संगम

लखनऊ, 21 नवम्बर 2025

प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोंद्योग मंत्री  राकेश सचान ने केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, गोमतीनगर, लखनऊ में 10 दिवसीय ‘खादी महोत्सव-2025’ का भव्य उद्घाटन किया। मंत्री सचान ने फीता काटकर तथा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।

महोत्सव में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए 160 से अधिक उद्यमियों एवं इकाइयों द्वारा स्थापित स्टॉल में खादी एवं ग्रामोद्योग से निर्मित उत्कृष्ट उत्पादों का प्रदर्शन किया गया है। खादी को गांधीजी ने स्वतंत्रता संग्राम की आत्मा कहा था। विदेशी वस्त्रों के बहिष्कार और स्वदेशी वस्त्र के रूप में खादी ने आजादी के आंदोलन में पूरे देश को एकजुट किया था। आज वही खादी केवल एक वस्त्र नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन चुकी है। अपने उद्बोधन में मंत्री श्री राकेश सचान ने कहा कि खादी महात्मा गांधी के स्वावलंबन के विचार से जुड़ी हुई है और आज प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री के नेतृत्व में स्वच्छता, स्वदेशी, स्वरोजगार तथा आत्मनिर्भर भारत के अभियान के अंतर्गत खादी पुनः राष्ट्रीय पहचान की शान बन रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश के सभी 18 मंडलों में खादी एवं ग्रामोद्योगी प्रदर्शनियों का आयोजन कर ग्रामीण उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। पिछले वर्ष आयोजित कुल 20 प्रदर्शनियों में 2000 से अधिक इकाइयों की भागीदारी रही और 44.38 करोड़ रुपये की बिक्री दर्ज की गयी, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

मंत्री सचान ने बताया कि खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा वर्तमान में 3,90,000 से अधिक लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक है। वर्ष 2025 में 66,640 युवाओं को टूलकिट प्रदान कर स्वरोजगार से जोड़ा गया है। दोना मेकिंग मशीन, पॉपकॉर्न मशीन, हनी बॉक्स और विद्युत चालित चाक जैसे उपकरण ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं। समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले उद्यमियों को राज्य स्तरीय पुरस्कार एवं चयनित लाभार्थियों को विभिन्न टूलकिट वितरित कर सम्मानित किया गया।

इस दौरान प्रमुख सचिव अनिल कुमार सागर ने कहा कि खादी अब आधुनिक डिजाइनों और तकनीकों के माध्यम से युवाओं की पहली पसंद बन रही है। फैशन शो एवं निफ्ट जैसी संस्थाओं की सहभागिता से खादी को नया स्वरूप मिल रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेज़न और फ्लिपकार्ट के माध्यम से खादी उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है, जिससे कारीगरों को अधिक आय और पहचान मिल रही है। उनका कहना था कि बेहतर गुणवत्ता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता है, ताकि उपभोक्ताओं का विश्वास लगातार मजबूत रहे।

लखनऊ वासियों से अपील की गई कि वे अधिक से अधिक संख्या में महोत्सव में पहुंचकर खादी उत्पादों की खरीदारी करें और ग्रामीण कारीगरों का मनोबल बढ़ाएं। साथ ही मीडिया प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया कि वे इस आयोजन का व्यापक प्रचार-प्रसार कर खादी को बढ़ावा देने में सहयोग करें। कार्यक्रम में विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

इस अवसर पर मंत्री राकेश सचान ने चयनित लाभार्थियों एवं उद्यमियों को पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किए। राज्य स्तरीय उत्कृष्ट इकाइयों के रूप में मेरठ के दीपक कुमार को प्रथम पुरस्कार स्वरूप 40,000 रुपये, गोण्डा की ममता को द्वितीय पुरस्कार स्वरूप 30,000 रुपये तथा हाथरस के संजय सिंह को तृतीय पुरस्कार स्वरूप 20,000 रुपये प्रदान कर सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त चयनित पांच लाभार्थियों शशि शुक्ला, पिंकी, उमाकांत, विद्यावती एवं हिन्दराज को दोना मेकिंग मशीन प्रदान की गई, वहीं पॉपकार्न मशीन का वितरण भी पांच लाभार्थियों सोनी, प्रीती, अर्जुन, किशन कुमार तथा श्री अंकित साहू को किया गया। इसी क्रम में हनी बॉक्स उपलब्ध कराए जाने हेतु राकेश वर्मा, मीना, शिवशंकर पटेल, अजय वर्मा एवं अनीता वर्मा को चयनित कर उन्हें सम्मानित किया गया। मिट्टी के शिल्पकला कार्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विद्युत चालित चाक भी पांच चयनित लाभार्थियों जियाउल हक, शिवकुमार, अनुराग प्रजापति, सुरेन्द्र कुमार तथा पीयूष प्रजापति को प्रदान किए गए। कार्यक्रम में पगमिल के लिए चयनित एकमात्र लाभार्थी पप्पी को उपकरण प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया।

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