आर्थिक समीक्षा 2025-26: एमएसएमई भारत की औद्योगिक ताकत, रोजगार और निर्यात की रीढ़

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के साथ-साथ रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला बन चुके हैं। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण द्वारा संसद में प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा 2025-26 में यह स्पष्ट किया गया है कि देश के औद्योगिक विकास में एमएसएमई की भूमिका अब निर्णायक और रणनीतिक हो चुकी है।

आर्थिक समीक्षा के अनुसार, भारत के कुल विनिर्माण उत्पादन में एमएसएमई की हिस्सेदारी 35.4 प्रतिशत, निर्यात में 48.58 प्रतिशत और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 31.1 प्रतिशत है। देश में 7.47 करोड़ से अधिक एमएसएमई इकाइयाँ कार्यरत हैं, जो लगभग 32.82 करोड़ लोगों को रोजगार प्रदान कर रही हैं। कृषि के बाद यह क्षेत्र सबसे अधिक रोजगार देने वाला दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र बन चुका है, जो समावेशी विकास की दिशा में इसकी अहमियत को दर्शाता है।

समीक्षा में बताया गया है कि वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में एमएसएमई ऋण, औद्योगिक ऋण विकास का प्रमुख कारक रहा। सरकार द्वारा ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए किए गए संरचनात्मक सुधारों और डिजिटल वित्तीय प्रणालियों ने इस क्षेत्र में सकारात्मक माहौल तैयार किया है। यही कारण है कि एमएसएमई ने हाल के वर्षों में आर्थिक अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूती बनाए रखी है।

एमएसएमई को पूंजी उपलब्ध कराने के लिए शुरू किया गया सेल्फ रिलायंट इंडिया (SRI) फंड भी उल्लेखनीय उपलब्धि बनकर उभरा है। 30 नवंबर 2025 तक 15,442 करोड़ रुपये के निवेश के साथ इस कोष ने 682 एमएसएमई इकाइयों को सहायता प्रदान की है। इसके साथ ही एमएसएमई इनोवेशन कंपोनेंट के जरिए नवाचार, इन्क्यूबेशन, डिजाइन और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) को संस्थागत समर्थन मिला है।

आर्थिक समीक्षा यह भी रेखांकित करती है कि भारत की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भागीदारी बढ़ रही है। वर्ष 2024 में भारत की वैश्विक विनिर्माण GVA में हिस्सेदारी लगभग 2.9 प्रतिशत और वैश्विक कपड़ा निर्यात में 1.8 प्रतिशत रही। यह संकेत है कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ते हुए भारत श्रम-प्रधान और संगठित क्षेत्रों में अधिक रोजगार सृजित करने वाले औद्योगीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

कुल मिलाकर, आर्थिक समीक्षा 2025-26 यह स्पष्ट संदेश देती है कि एमएसएमई न केवल वर्तमान की जरूरत हैं, बल्कि भारत के दीर्घकालिक औद्योगिक और आर्थिक भविष्य की कुंजी भी हैं

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