रक्षा मंत्री ने कहा कि वैश्विक समुद्री अनिश्चितता के वर्तमान दौर में भारत ने बार-बार यह साबित किया है कि वह न केवल अपने हितों की रक्षा करता है, बल्कि पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता को भी सुनिश्चित करता है। उन्होंने आगे कहा कि यह दृष्टिकोण भारत को एक जिम्मेदार समुद्री शक्ति बनाता है। राजनाथ सिंह ने उभरते प्रौद्योगिकी-आधारित और बहुआयामी खतरों के बीच समुद्री क्षेत्र को निरंतर मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि भारतीय तटरक्षक बल केवल एक प्रतिक्रियावादी बल के रूप में कार्य नहीं कर सकता; इसे एक सक्रिय बल के रूप में उभरना होगा, और सरकार इस प्रयास को सहयोग देने के लिए हर संभव प्रयास करेगी। चाहे वह नए जहाजों का अधिग्रहण हो, नई इकाइयां स्थापित करने के लिए भूमि का पट्टा हो या मानव संसाधन से संबंधित मामले हों, हम भारतीय तटरक्षक बल को हर पहलू में आधुनिक बनाने के लिए प्रयासरत हैं।

पहली बार, इस जहाज पर दो महिला अधिकारी होंगी। रक्षा मंत्री ने सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप समावेशी और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए आईसीजी की सराहना करते हुए कहा कि यह गर्व की बात है कि आज महिला अधिकारियों को पायलट, ऑब्जर्वर, एयर ट्रैफिक कंट्रोलर, लॉजिस्टिक्स ऑफिसर और लॉ ऑफिसर के रूप में नियुक्त किया जा रहा है, साथ ही उन्हें होवरक्राफ्ट संचालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और अग्रिम मोर्चे पर सक्रिय रूप से तैनात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज महिलाएं न केवल सहायक भूमिका निभा रही हैं, बल्कि अग्रिम मोर्चे पर योद्धाओं के रूप में राष्ट्र की सेवा कर रही हैं। भारतीय तटरक्षक बल के समुद्र प्रताप में नियुक्त दोनों महिला अधिकारी भावी पीढ़ियों के लिए आदर्श हैं। भारतीय तटरक्षक बल सभी के लिए अवसरों और विकास का स्रोत बना रहेगा। भारतीय तटरक्षक बल के आत्मनिर्भरता प्रयासों की सराहना करते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सरकार का ‘आत्मनिर्भर भारत‘ का नारा अब कार्यशैली का हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा कि मेक-इन-इंडिया और आत्मनिर्भर भारत पहलों के अनुरूप, भारतीय तटरक्षक बल ने स्वदेशी संसाधनों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज हमारे तटरक्षक जहाजों और विमानों का निर्माण, रखरखाव और मरम्मत देश में ही हो रही है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है।रक्षा मंत्री ने वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय तटरक्षक बल के लिए एक प्लेटफॉर्म-केंद्रित बल से खुफिया-आधारित और एकीकरण-केंद्रित बल में परिवर्तित होने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने समुद्री कानून प्रवर्तन, पर्यावरण संरक्षण और समुद्री साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भारतीय तटरक्षक बल के अंदर विशिष्ट कैरियर स्ट्रीम विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
राजनाथ सिंह ने कहा कि हाल के वर्षों में भारतीय तटरक्षक बल ने क्षेत्रीय स्तर पर मानक स्थापित किए हैं और अब समय आ गया है कि इस भूमिका को वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाया जाए। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में हमें समुद्री प्रशासन के क्षेत्र में मानदंड तय करने होंगे, क्षमता निर्माण पहलों को मजबूत करना होगा और सहयोगात्मक ढांचों को बढ़ावा देना होगा। भारतीय तटरक्षक बल को अपने परिचालन सिद्धांतों, संस्थागत प्रथाओं और तकनीकी नवाचारों को ऐसे उच्च मानकों तक पहुंचाना होगा कि उनकी सर्वोत्तम प्रणालियों का विश्व स्तर पर अनुसरण किया जाए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय तटरक्षक बल रक्षा क्षेत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। इस अवसर पर गोवा के मुख्यमंत्री डॉ. प्रमोद सावंत, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, आईसीजी के महानिदेशक परमेश शिवमणि, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक श्री ब्रजेश कुमार उपाध्याय और केंद्र एवं राज्य सरकारों के अधिकारी उपस्थित थे।
समुद्र प्रताप के बारे में
समुद्र प्रताप, जिसका अर्थ है समुद्रों के वैभव को सुरक्षित, स्वच्छ और स्वच्छ समुद्र सुनिश्चित करने और राष्ट्र के समुद्री हितों की रक्षा करने के संकल्प को दर्शाता है। इस जहाज का विस्थापन 4,170 टन, लंबाई 114.5 मीटर और गति 22 समुद्री मील से अधिक है। यह दो 7,500 किलोवाट डीजल इंजनों द्वारा संचालित है, जो स्वदेशी रूप से विकसित नियंत्रणीय पिच प्रोपेलर और गियरबॉक्स द्वारा संचालित होते हैं, जिससे यह उत्कृष्ट गतिशीलता, लचीलापन और 6 हजार समुद्री मील की सहनशक्ति प्रदान करता है।

यह पोत अत्याधुनिक प्रणालियों से सुसज्जित है, जिनमें पार्श्व-स्वीपिंग आर्म, फ्लोटिंग बूम, उच्च क्षमता वाले स्किमर, पोर्टेबल बार्ज और प्रदूषण नियंत्रण प्रयोगशाला शामिल हैं। जहाज में बाह्य अग्निशमन प्रणाली (एफआई- एफआई क्लास 1) भी लगी है और स्वचालन एवं मिशन दक्षता बढ़ाने के लिए इसमें डायनेमिक पोजिशनिंग, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम जैसी उन्नत प्रणालियां एकीकृत हैं। इसके शस्त्रागार में 30 मिमी सीआरएन-91 तोप और दो 12.7 मिमी स्थिर रिमोट-नियंत्रित तोपें शामिल हैं, जो आधुनिक अग्नि-नियंत्रण प्रणालियों द्वारा समर्थित हैं। जहाज कोच्चि में तैनात रहेगा और तटरक्षक क्षेत्र (पश्चिम) के कमांडर के परिचालन नियंत्रण में रहेगा, जिसका संचालन तटरक्षक जिला मुख्यालय संख्या 4 (केरल और माहे) के माध्यम से किया जाएगा।
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