आफ्थैल्मिक सोसाइटी की ओर से दो दिवसीय नेत्र कार्यशाल के आयोजन में आंखों के इलाज को लेकर मतभेद हैं जिसकी वजह से डॉक्टर और दवाई कंपनियों के बीच में मरीज पिसता है इसको व्यंग्यात्मक नाटक के रूपांतरण में दिखाने की कोशिश की गई
जिसमें डॉक्टरों ने ही वकील का रोल निभाते हुए अपनी-अपनी बातों को तथ्यों के साथ रखा और उन्हीं के बीच में एक डॉक्टर ने जज की भूमिका निभाते हुए फैसला भी सुनाया।
आफ्थैल्मिक सोसाइटी के सचिव डॉक्टर मोहित खत्री ने बताया कि इस कार्यशाला में उत्तर प्रदेश समेत कर्नाटक और महाराष्ट्र से भी डॉक्टर के समूह आए हैं साथ ही कुछ अंतरराष्ट्रीय डाक्टरों के समूह भी आए हैं और ऑनलाइन भी जुड़े हैं। इस कार्यशाला का फायदा यह होगा कि आपस में एक दूसरे के बीच में अपने एक्सपीरियंस, टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का आदान-प्रदान होगा जिसका फायदा डॉक्टरों के साथ मरीजों को भी मिलेगा