यूनियन बैंक के 5017 करोड़ मुनाफे के पीछे धीमी जमा वृद्धि और एनपीए की चिंता
एनीटाइम न्यूज नेटवर्क यूनियन बैंक ऑफ इंडिया ने भले ही वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में 18 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 5017 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया हो, लेकिन बैंक के ताजा वित्तीय नतीजे कई चिंताजनक संकेत भी दे रहे हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। बैंक की मुनाफे में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कर्ज वितरण में तेजी के चलते आई है, जबकि जमा वृद्धि अपेक्षाकृत कमजोर बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक बैंक की कुल जमाराशि में वर्ष दर वर्ष आधार पर सिर्फ 3.36 फीसदी की वृद्धि हुई है, जो बैंकिंग सेक्टर के लिहाज से कमजोर मानी जा रही है।
कर्ज बढ़ा, लेकिन जमा पीछे
तीसरी तिमाही में बैंक के सकल अग्रिमों में 7.13 फीसदी की सालाना वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इसी अवधि में जमाराशि की रफ्तार काफी पीछे रही। विशेषज्ञों का मानना है कि क्रेडिट-डिपॉजिट गैप लंबे समय में बैंक की लिक्विडिटी और फंडिंग कॉस्ट पर दबाव बढ़ा सकता है।
31 दिसंबर 2025 तक यूनियन बैंक का कुल कारोबार ₹22.39 लाख करोड़ तक पहुंच गया है, लेकिन डिपॉजिट ग्रोथ की सुस्ती बैंक के लिए आने वाले समय में बड़ी चुनौती बन सकती है।
ब्याज आय बढ़ी, मार्जिन पर दबाव की आशंका
बैंक की ब्याज आय 26,443 करोड़ रुपये रही, जो पिछली तिमाही से 5.85 फीसदी अधिक है। हालांकि, तेजी से बढ़ते कर्ज और सीमित जमा के कारण नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
एनपीए में गिरावट, लेकिन जोखिम खत्म नहीं
यूनियन बैंक ने सकल एनपीए को 3.06 फीसदी और शुद्ध एनपीए को 0.51 फीसदी तक घटाने में सफलता जरूर हासिल की है, लेकिन बैंकिंग जानकारों के मुताबिक बढ़ते रिटेल और एमएसएमई ऋण के बीच एसेट क्वालिटी पर सतर्क नजर बनाए रखना जरूरी होगा।
रैम सेक्टर पर बढ़ती निर्भरता
तीसरी तिमाही में बैंक के रिटेल, एग्री और एमएसएमई (RAM) क्षेत्र में 11.50 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें रिटेल लोन में 21.67 फीसदी और एमएसएमई अग्रिमों में 19.75 फीसदी की तेज बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, एमएसएमई सेक्टर की संवेदनशीलता को देखते हुए यह तेज विस्तार भविष्य में जोखिम भी बढ़ा सकता है। यूनियन बैंक का मुनाफा जरूर बढ़ा है, लेकिन धीमी जमा वृद्धि, क्रेडिट-डिपॉजिट असंतुलन और उच्च जोखिम वाले सेगमेंट में तेज कर्ज विस्तार जैसे पहलू यह संकेत देते हैं कि बैंक के सामने चुनौतियां अभी खत्म नहीं हुई हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में बैंक के लिए जमा जुटाने, एसेट क्वालिटी बनाए रखने और मार्जिन को संतुलित रखने की परीक्षा और कठिन हो सकती है।
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