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सरकार का प्रयास प्रदेश को शीघ्र मिले उत्पादक राज्य का दर्जा – मंत्री सुरेश कु खन्ना

रोलर फ्लोर मिल उद्योग को मिले मंडी शुल्क में छूट तो किसान, आम उपभोक्ता व उद्यमी सभी को हो समान लाभ- अध्यक्ष दीपक कुमार बजाज
सरकार की नीति व नियत एक ही है कि प्रदेश में उद्योग का विकास व विस्तार हो- सी ई ओ राज्य परिवर्तन आयोग मनोज कुमार सिंह

उत्तर प्रदेश रोलर फ्लोर मिलर्स एसोसिएशन के वेबसाईट कोवित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने किया लॉंच

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। उत्तर प्रदेश में पूरी क्षमता से सभी रोलर फ्लोर मिल उद्योग संचालित हो और नए रोलर फ्लोर मिल स्थापित हो जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो और किसानो को उनकी उपज का बेहतर दाम मिले । ये बातें यूपी में रोलर फ्लोर मिलों की प्रतिस्पर्धा पर चर्चा कार्यक्रम में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने लखनऊ के एक निजी होटल में कही। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का प्रयास रहेगा कि उत्तर प्रदेश को शीघ्र मिले उत्पादक राज्य का दर्जा जिससे विकास की गति और तीव्र हो ।विशिष्ट अतिथि दिनेश प्रताप सिंह राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), उद्यान, कृषि विपणन एवं कृषि निर्यात ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जुड़े यह उद्योगपति उद्योग को संचालित करके राज्य के वित्त कोष को मजबूत कर रहे है,रोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं, व देश के अन्नदाता किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य उपलब्ध करा रहे हैं साथ ही खाद्य सामग्री उपलब्ध कराकर समाज ऋण का भी भुगतान कर रहे है । कार्यक्रम संयोजक मनोज कुमार सिंह मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राज्य परिवर्तन आयोग ने बताया की उत्तर प्रदेश सरकार की नीति व नियत एक ही है और वो यह है कि प्रदेश में उद्योग का विकास व विस्तार हो, आज प्रदेश में बेहतरीन सड़क नेटवर्क, एक्सप्रेसवे का जाल, अनेक हवाई अड्डे व मजबूत क़ानून व्यवस्था है जो प्रदेश में उद्योग स्थापना व संचालन को प्रोत्साहित करते हैं ।

संस्था के अध्यक्ष दीपक कुमार बजाज ने सभा को संबोधित करते हुए बताया कि उत्तर प्रदेश देश में गेहूं उत्पादन में प्रथम स्थान पर है, जहां लगभग 360 लाख टन गेहूं का उत्पादन होता है। इसके बावजूद प्रदेश में स्थापित लगभग 350 से अधिक फ्लोर मिलें अपनी कुल प्रसंस्करण क्षमता का मात्र 35दृ40 प्रतिशत ही उपयोग कर पा रही हैं। इसका प्रमुख कारण गेहूं प्रसंस्करण पर लगने वाला मंडी शुल्क है, जबकि कई अन्य राज्यों में यह शुल्क समाप्त किया जा चुका है। हम सरकार से एकस्वर में माँग करते हैं कि फ्लोर मिलों को गेहूं की खरीद चाहे वह किसानों से हो या व्यापारियों के माध्यम से पर बिना शर्त मंडी शुल्क से छूट प्रदान की जाए। इससे गेहूं प्रसंस्करण में वृद्धि होगी, रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, सहायक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा तथा राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम के अंत में यह निष्कर्ष प्रस्तुत किया गया कि “यदि गेहूं उत्तर प्रदेश की शक्ति है, तो उसका प्रसंस्करण राज्य की पहचान बनेगा।” गेहूं प्रसंस्करण हेतु मंडी शुल्क में छूट कोई रियायत नहीं, बल्कि रोजगार सृजन, किसानों की आय वृद्धि और प्रदेश के औद्योगिक विकास में दीर्घकालिक निवेश है। कार्यक्रम में इंद्र विक्रम सिंह सचिव मंडी परिषद, धर्मेन्द्र जैन, चंदन सावरिया, प्रमोद वैश्य, मदन लाल जिंदल, अर्जुन अग्रवाल, विजय गुप्ता, अंकित केडिया, श्याम सुंदर बजाज, श्रीकिशन अग्रवाल, मंजीत सिंह, रामचंद्र सिंघल, आकाश जालान, सुरेश सिंघल, प्रमोद राव, शीतल अग्रवाल सहित पूरे प्रदेश के उद्यमी मौजूद रहे ।

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