आरबीआई ने 16 एनबीएफसी के पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द किए, नियामकीय अनुपालन की दिशा में बड़ा कदम

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने नियामकीय अनुपालन को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए देश की 16 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के पंजीकरण प्रमाणपत्र (ब्मतजपपिबंजम व ित्महपेजतंजपवद दृ ब्वत्) को रद्द कर दिया है। इन कंपनियों ने स्वयं आरबीआई को अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटा दिए थे, जिसके बाद केंद्रीय बैंक ने भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 45-आईए (6) के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह निर्णय लिया। आरबीआई द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन एनबीएफसी ने या तो गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (एनबीएफआई) के रूप में अपना व्यवसाय बंद कर दिया था या फिर वे अपंजीकृत कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी  के लिए निर्धारित मानदंडों को पूरा करने लगी थीं, जिनके लिए आरबीआई से पंजीकरण अनिवार्य नहीं होता। ऐसे में इन कंपनियों का एनबीएफसी के रूप में पंजीकृत रहना नियामकीय दृष्टि से आवश्यक नहीं रह गया था।

व्यवसाय से बाहर निकलने और नियामकीय श्रेणी में बदलाव के कारण कार्रवाई आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों ने एनबीएफआई व्यवसाय से बाहर निकलने का निर्णय लिया, उन्होंने स्वेच्छा से अपना पंजीकरण प्रमाणपत्र लौटाया। इसके अतिरिक्त कुछ कंपनियाँ ऐसी थीं, जो कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (ब्प्ब्) की उस श्रेणी में आ गईं, जहां नियमानुसार आरबीआई के पंजीकरण की आवश्यकता नहीं होती। इन दोनों ही परिस्थितियों में आरबीआई ने नियमानुसार उनके पंजीकरण प्रमाणपत्र को रद्द कर दिया।

प्रमुख कंपनियों का विवरण इस सूची में शामिल कंपनियों में श्याम बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और श्रुति फिनसेक प्राइवेट लिमिटेड प्रमुख हैं। श्याम बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का पंजीकृत कार्यालय जयपुर, राजस्थान में स्थित है। कंपनी को कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में 24 मई 2013 को पंजीकरण प्रदान किया गया था, जिसे 12 दिसंबर 2025 को रद्द कर दिया गया। वहीं, श्रुति फिनसेक प्राइवेट लिमिटेड का पंजीकृत कार्यालय कानपुर, उत्तर प्रदेश में है। इस कंपनी को 26 फरवरी 1998 को पंजीकरण दिया गया था, जिसे 16 दिसंबर 2025 को रद्द कर दिया गया। आरबीआई द्वारा जारी सूची में इसी प्रकार कुल 16 एनबीएफसी शामिल हैं, जिन्होंने अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस कर दिए हैं।

नियामकीय पारदर्शिता की दिशा में आरबीआई का प्रयास विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम एनबीएफसी सेक्टर में पारदर्शिता, अनुशासन और नियामकीय स्पष्टता को बढ़ावा देने की दिशा में अहम है। आरबीआई समय-समय पर ऐसे कदम उठाता रहा है, ताकि केवल वही संस्थाएं वित्तीय गतिविधियों में संलग्न रहें, जो नियमानुसार सक्रिय और पात्र हों। आरबीआई ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया है, वे अब एनबीएफसी के रूप में कोई भी वित्तीय गतिविधि नहीं कर सकेंगी। इससे निवेशकों और आम जनता के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।

एनबीएफसी सेक्टर के लिए संदेश यह कार्रवाई एनबीएफसी सेक्टर के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि नियामकीय नियमों का पालन करना अनिवार्य है। यदि कोई कंपनी अपने व्यवसाय की प्रकृति में बदलाव करती है या वित्तीय गतिविधियों से बाहर निकलती है, तो उसे नियमानुसार आरबीआई को सूचित करना होगा।कुल मिलाकर, आरबीआई की यह पहल वित्तीय प्रणाली को मजबूत, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाए रखने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

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