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भारतीय समाज विज्ञान अकादमी प्रयागराज ने गोल्डन जुबली पर किया नेशनल सिंपोजियम का आयोजन

भातीय समाज विज्ञान अकादमी प्रयागराज ने किया गोल्डन जुबली का आयोजन | ज्ञात होगी की आज से 50 वर्ष पूर्व इलाहाबाद विश्वविद्यालय के गांधी सदन में भारतीय समाज विज्ञान अकादमी का गठन 15 अगस्त 1974 में हुआ बताते चलें कि यह अकादमी भारत की प्रमुख चार अकादमी में से एक है इसके संस्थापकों ने प्राकृतिक- मानव- समाज (नेचर ह्यूमन सोसाइटी) के परस्पर समन्वय को ध्यान में रखकर भारतीय समाज विज्ञान अकादमी की स्थापना की, जो आज भी अपने मूलभूत सिद्धांत की ओर अग्रसर है यह अकादमी भारत के किसी विश्वविद्यालय या संस्थान में अपना पांच दिवसीय अधिवेशन प्रत्येक वर्ष एक नए विषय को लेकर करती है |


जिसके अंतर्गत शोधार्थियों द्वारा 28 रिसर्च कमेटी तथा 21 थेमेटिक पैनल्स के माध्यम से अपने-अपने शोध प्रस्तुत किए जाते हैं, भारत में पढ़ाए जाने वाला कोई भी विषय इससे अछूता नहीं है | भारतीय समाज विज्ञान अकादमी संदेश देती है “साइंस इज सोशल ” अकादमी ने अपने 50 वर्ष के इतिहास पर 15 अगस्त 2024 को ईश्वर शरण पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री कॉलेज प्रयागराज में एक स्मारिका जारी की इस अवसर पर “अपनी भाषा, अपना ज्ञान -विज्ञान, अपने लोग अपना देश” विषय पर नेशनल सिंपोजियम का भी आयोजन किया गया जिसमें भारत के कई प्रदेश के लोगों ने हिस्सा लिया यह जानकारी लखनऊ से आए डॉक्टर मनीराम सिंह ने दी इस सिंपोजियम की अध्यक्षता लखनऊ से आए जाने माने प्रतिष्ठित शल्य चिकित्सक एवं एम्स भोपाल के संस्थापक निर्देशक प्रोफेसर संदीप कुमार ने की इस सिंपोजियम के माध्यम से भारतीय समाज विज्ञान अकादमी के संस्थापक सदस्य एवं इसके सूत्रधार डॉक्टर एनपी चौबे जी ने कहा कि भारत को अगर विज्ञान के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करने हैं तो उसे विज्ञान अपनी ही क्षेत्रीय भाषाओं में पढ़ना और पढ़ाना होगा इस अवसर पर डॉक्टर मनीराम सिंह ने अपने विचार साझा करते हुए कहा की भारतीय समाज विज्ञान अकादमी अपने पांचवें दशक से गुजर रही है उम्र के ढलने की झुर्रियां उसके चेहरे पर देखी जा सकती हैं डॉक्टर सिंह ने कहा “परिवर्तन प्रकृति का नियम है, उसका होना स्वाभाविक है, समाज में हो रहे परिवर्तन को स्वीकार करना ही बेहतर है” भारतवर्ष में परिवर्तन की प्रासंगिकता भौगोलिक दृष्टि से और भी अधिक बढ़ जाती है क्योंकि विविधता में एकता भारत का अपना एक सौंदर्य है|

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