एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। 5 दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर देशभर में बैंककर्मियों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल की। हड़ताल के तहत लखनऊ में इंडियन बैंक, हजरतगंज के समक्ष बैंककर्मियों ने जोरदार प्रदर्शन और सभा का आयोजन किया। प्रदर्शन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के हजारों कर्मचारी और अधिकारी शामिल हुए।
फोरम के जिला संयोजक अनिल श्रीवास्तव ने बताया कि हड़ताल से पूर्व बैंककर्मियों ने 5 दिवसीय बैंकिंग की मांग को लेकर धरना, प्रदर्शन, रैलियां और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अभियान भी चलाया, लेकिन केंद्र सरकार बैंककर्मियों की इस एकमात्र और जायज मांग को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार की अनदेखी के कारण बैंककर्मी आंदोलन के लिए मजबूर हुए हैं।
सभा को संबोधित करते हुए एनसीबीई के महामंत्री कॉमरेड डी.के. सिंह ने कहा कि जब रिजर्व बैंक, एलआईसी, सेबी, नाबार्ड, एनपीसीआई, सीवीसी, डीएफएस सहित अनेक सरकारी विभागों में 5 कार्य दिवस लागू हैं, तो फिर बैंकों में यह व्यवस्था क्यों नहीं हो सकती। उन्होंने इसे बैंककर्मियों के साथ खुली नाइंसाफी बताया।
प्रदेश संयोजक वाई.के. अरोड़ा ने स्पष्ट किया कि बैंककर्मी महीने में केवल 2 से 3 शेष शनिवारों को अवकाश की मांग कर रहे हैं और इसके बदले प्रतिदिन 40 मिनट अतिरिक्त कार्य करने को भी तैयार हैं। उन्होंने कहा कि यह मांग पूरी तरह व्यावहारिक और कर्मचारी हित में है।
कॉमरेड आर.एन. शुक्ला ने कहा कि सरकार को बैंककर्मियों की व्यावसायिक और पारिवारिक जरूरतों को समझना चाहिए। वहीं कॉमरेड एस.के. संगतानी ने सरकार की हठधर्मिता पर सवाल उठाते हुए बताया कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) पहले ही इस मांग को स्वीकार कर सरकार के पास अनुमोदन के लिए भेज चुका है, लेकिन सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा है।
प्रदर्शन के दौरान कॉमरेड मनमोहन दास ने कहा कि 5 दिवसीय बैंकिंग कोई भीख नहीं बल्कि बैंककर्मियों का अधिकार है, और इसके लिए वे लंबी लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। सभा को संबोधित करने वाले अन्य बैंक नेताओं—लक्ष्मण सिंह, शकील अहमद, संदीप सिंह, वीके माथुर, बीडी पांडे, एसडी मिश्रा, विभाकर कुशवाहा, आनंद सिंह, विशाखा वर्मा, स्वाति सिंह—ने कहा कि बैंक हड़ताल से आम जनता को होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी केंद्र सरकार की है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने बैंककर्मियों पर बढ़ते कार्य दबाव और मानसिक तनाव का मुद्दा भी उठाया। वी.के. सेंगर, राकेश पांडेय, ललित श्रीवास्तव, मनीषकांत, एस.के. अग्रवाल, नंदू त्रिवेदी, वी.के. श्रीवास्तव, अनुषा दुबे, विनय श्रीवास्तव, प्रीति वर्मा सहित अन्य नेताओं ने कहा कि 5 दिवसीय बैंकिंग से न केवल कर्मचारियों का तनाव कम होगा, बल्कि कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।
मीडिया प्रभारी अनिल तिवारी ने जानकारी दी कि राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के कारण लखनऊ में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की 905 शाखाओं के लगभग 16 हजार कर्मचारी और अधिकारी हड़ताल पर रहे। अनुमान के अनुसार शहर में करीब 2500 करोड़ रुपये की क्लियरिंग प्रभावित हुई।
बैंक यूनियनों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया जाएगा।
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