गणतंत्र दिवस 2026 पर उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी की भव्य झांकी, संत साई चंडूराम साहिब जी को समर्पित

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क।  77वें गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर उत्तर प्रदेश सिंधी अकादमी द्वारा उत्तर प्रदेश के बदलते स्वरूप और सांस्कृतिक समरसता को दर्शाती एक भव्य झांकी का प्रदर्शन किया गया। यह झांकी सिंधी धर्म गुरु एवं आध्यात्मिक मर्यादा पुरुषोत्तम संत साई चंडूराम साहिब जी को समर्पित रही। इस प्रेरणादायी पहल के पीछे अकादमी के निवर्तमान उपाध्यक्ष नानक चंद लखमानी जी के विशेष प्रयास सराहनीय रहे।

झांकी में संत साई चंडूराम साहिब जी के दिव्य स्वरूप को अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक भाव के साथ प्रस्तुत किया गया। वर्ष 1947 में जन्मे संत साई चंडूराम साहिब जी ने अपने जीवन को मानवता, एकता और निःस्वार्थ सेवा के संदेश को समर्पित कर दिया। उन्होंने लखनऊ में शिव शांति संत असुदाराम आश्रम की स्थापना कर समाज के जरूरतमंद वर्गों के लिए सेवा, सहयोग और करुणा का मार्ग प्रशस्त किया। संत जी का जीवन दर्शन समाज के लिए आज भी प्रेरणास्रोत है। वे अक्सर कहा करते थे—
“किसी के काम जो आए उसे इंसान कहते हैं, पराया दर्द जो अपनाए उसे इंसान कहते हैं।”
उनका यह संदेश झांकी के माध्यम से जन-जन तक पहुंचता हुआ दिखाई दिया।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर सखी बाबा युवा मंडल द्वारा हजरतगंज चौराहे पर रॉयल कैफे के निकट संत साई चंडूराम साहिब जी की आरती एवं पूजा का आयोजन भी किया गया। इस धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन में श्रद्धा, आस्था और सामाजिक एकता का भाव स्पष्ट रूप से झलकता रहा।

कार्यक्रम में शिव शांति आश्रम से साई हरीश लाल  विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ  नानक चंद लखमानी जी, मुरलीधर आहूजा जी, सुदामाचंद चंदवानी जी, राजू पंजवानी जी, सुमित मंगलानी जी, हैप्पी कुकरेजा जी, दर्पण लखमानी जी, राजेश हिरवानी जी,  लाल चंद खटवानी जी, ओम प्रकाश खेतपाल जी, अमर अठवानी जी सहित बड़ी संख्या में सिंधी समाज के सेवादार एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सभी उपस्थितजनों ने इस भव्य झांकी के आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ का आभार व्यक्त किया। समाज के प्रतिनिधियों ने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन और सहयोग से प्रदेश में सभी समुदायों को अपनी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है।

समग्र रूप से यह झांकी केवल एक सांस्कृतिक प्रस्तुति नहीं, बल्कि मानवता, सेवा, आध्यात्मिकता और सामाजिक सौहार्द का जीवंत संदेश थी, जिसने गणतंत्र दिवस 2026 को और अधिक गरिमामय बना दिया।

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