निजी टाउनशिप के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का होगा थर्ड पार्टी ऑडिट
एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। राजधानी लखनऊ में निजी टाउनशिपों में पर्यावरण संरक्षण और सीवेज प्रबंधन को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मण्डलायुक्त लखनऊ विजय विश्वास पंत ने गोमती नगर विस्तार स्थित शालीमार वन वर्ल्ड और ओमैक्स ग्रुप की टाउनशिप का निरीक्षण कर दोनों परियोजनाओं में एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान दोनों टाउनशिपों की व्यवस्था में स्पष्ट अंतर देखने को मिला।
निरीक्षण की शुरुआत शालीमार वन वर्ल्ड से हुई, जहां एसटीपी पूरी तरह क्रियाशील पाया गया। मण्डलायुक्त ने एसटीपी में आने वाले सीवेज जल और शोधित जल की गुणवत्ता रिपोर्ट देखी, जो सभी निर्धारित मानकों के अनुरूप पाई गई। प्रशासन को बताया गया कि शोधित जल का उपयोग सोसाइटी के पार्कों और ग्रीन बेल्ट की सिंचाई में किया जा रहा है, जिससे जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिल रहा है। अधिकारियों ने शालीमार की इस पहल को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकास मॉडल बताया।
वहीं इसके विपरीत ओमैक्स ग्रुप की टाउनशिप में एसटीपी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े होते नजर आए। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि शोधित जल का उपयोग केवल टॉयलेट ब्लॉक तक सीमित है, जबकि परियोजना की डीपीआर के अनुसार इसके व्यापक और प्रभावी उपयोग की अपेक्षा की जाती है। एसटीपी की क्षमता, संचालन और निगरानी को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखा।
मण्डलायुक्त विजय विश्वास पंत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि लखनऊ में निजी विकासकर्ताओं द्वारा विकसित सभी टाउनशिपों में स्थापित एसटीपी का थर्ड पार्टी ऑडिट अनिवार्य रूप से कराया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट परियोजना की क्षमता के अनुरूप बने हों और उनका संचालन पर्यावरणीय मानकों के अनुसार हो।
इसके साथ ही मण्डलायुक्त ने ओमैक्स सहित सभी निजी विकासकर्ताओं को निर्देश दिए कि एसटीपी के संचालन के लिए प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की गाइडलाइन के अनुसार एसओपी (Standard Operating Procedure) तत्काल तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वाले बिल्डरों के खिलाफ आगे कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।
निरीक्षण के दौरान एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार, मुख्य नगर नियोजक के.के. गौतम सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और अभियंता उपस्थित रहे। प्रशासन का मानना है कि जहां शालीमार जैसी टाउनशिप पर्यावरण संरक्षण में उदाहरण प्रस्तुत कर रही हैं, वहीं कुछ परियोजनाओं में अभी सुधार की गंभीर आवश्यकता है।
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