एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। देश में सोना और चांदी की बेकाबू होती कीमतों ने आम जनता के साथ-साथ पारंपरिक सर्राफा कारोबार को गंभीर संकट में डाल दिया है। मौजूदा समय में सोना ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम और चांदी ₹3,16,000 प्रति किलोग्राम के पार पहुँच चुकी है, जिससे शादी-विवाह और धार्मिक अवसरों पर होने वाली खरीदारी लगभग ठप हो गई है।
इसी को लेकर चौक सर्राफा एसोसिएशन लखनऊ के महामंत्री एवं ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन (कैट) के उत्तर प्रदेश संयोजक श्री विनोद महेश्वरी ने प्रधानमंत्री और केंद्रीय वित्त मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। उन्होंने कहा कि इन असामान्य दामों ने देश की मिडिल क्लास जनता की कमर तोड़ दी है और छोटे-मझोले सर्राफा व्यापारी आजीविका खोने की कगार पर खड़े हैं।
श्री महेश्वरी ने पत्र में उल्लेख किया कि ग्राहक खरीदारी करने में असमर्थ हैं, शादियाँ टल रही हैं और स्थानीय बाजारों में कारोबार पूरी तरह से ठप होता जा रहा है। उन्होंने चिंता जताई कि कई छोटे व्यापारी दिवालिया हो चुके हैं, घाटा कवर न कर पाने के कारण मानसिक तनाव बढ़ रहा है और कुछ स्थानों पर आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएँ भी सामने आ रही हैं।
उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि सोना-चांदी अब सांस्कृतिक और पारंपरिक आवश्यकता की वस्तु न रहकर सट्टा बाजार का साधन बन गई है। 3 प्रतिशत जीएसटी, ऊँची आयात शुल्क (इम्पोर्ट ड्यूटी) और एमसीएक्स में अनियंत्रित सट्टेबाजी ने हालात को और अधिक बिगाड़ दिया है।
सर्राफा संगठनों ने सरकार से मांग की है कि सोना-चांदी पर लगाया गया 3 प्रतिशत जीएसटी तत्काल हटाया जाए या कम से कम 1 प्रतिशत किया जाए। साथ ही आयात शुल्क में कटौती की जाए और एमसीएक्स में सट्टेबाजी पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए। उन्होंने यह भी प्रस्ताव रखा कि शादी-विवाह से जुड़े आभूषणों को विशेष राहत श्रेणी में रखा जाए या वाहन और मकान की तरह ईएमआई सुविधा प्रदान की जाए।
व्यापारियों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो देश का पारंपरिक लोकल सर्राफा बाजार समाप्त हो जाएगा और लाखों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। सर्राफा समुदाय को उम्मीद है कि केंद्र सरकार उनकी पीड़ा को समझते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेगी।
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