न्याय का प्रसार करना हमारा सामूहिक दायित्व: मौलाना अतीक बस्तावी

विधि साक्षरता से मजबूत होगा समाज, मदरसा विद्यार्थी किसी से कम नहीं: विद्वान

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। न्याय की स्थापना और मानवाधिकारों की रक्षा प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक और मानवीय अधिकार है, जबकि न्याय का प्रसार करना समाज के प्रत्येक जागरूक नागरिक का दायित्व है। इस्लाम न्याय, समानता और मानवता की सर्वोच्च शिक्षा देता है, जो केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं बल्कि समस्त जीव-जगत के लिए है। यह विचार मौलाना अतीक बस्तावी ने व्यक्त किए। वे मजलिस-ए-अक्सा शरिया नदवत-उल-उलमा के तत्वावधान में आयोजित विधि साक्षरता पाठ्यक्रम के वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे।

टोंकी हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षाविद और धर्मगुरु उपस्थित रहे। मौलाना अतीक बस्तावी ने कहा कि कुरान में न्याय से संबंधित स्पष्ट आयतें मौजूद हैं और न्याय करना केवल एक धार्मिक आदेश नहीं, बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान इस्लामी शिक्षाओं में निहित न्याय, समानता और अधिकारों के सिद्धांतों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करता है। छात्रों को चाहिए कि वे कानूनों की सही समझ विकसित करें और संविधान के अनुरूप समाज में न्याय सुनिश्चित करें।

इस अवसर पर प्रोफेसर नसीम जाफरी ने कहा कि मदरसा शिक्षा आज किसी भी आधुनिक शिक्षण संस्थान से कमतर नहीं है। उन्होंने कहा कि मदरसों के विद्यार्थी बौद्धिक, नैतिक और सामाजिक दृष्टि से सक्षम हैं और विधि साक्षरता जैसे पाठ्यक्रम उन्हें समाज की मुख्यधारा से और अधिक सशक्त रूप से जोड़ते हैं।

मौलाना खालिद रशीद ने अपने संबोधन में कहा कि यदि विद्वान घरेलू कानूनों के साथ-साथ इस्लामी कानूनों की भी गहरी समझ रखें, तो वे न्यायालयों में अधिक सशक्त और ठोस तर्क प्रस्तुत कर सकते हैं। इससे न केवल समुदाय को बल्कि संपूर्ण समाज को न्याय दिलाने में मदद मिलेगी।

इस्लामिक रिसर्च काउंसिल के अंतर्गत संचालित विधि साक्षरता पाठ्यक्रम की सराहना करते हुए वक्ताओं ने बताया कि यह कोर्स पिछले तीन वर्षों से सफलतापूर्वक संचालित हो रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। छात्रों को कानून, संविधान और न्याय प्रणाली की व्यावहारिक समझ मिल रही है।

कार्यक्रम के अंत में मौलाना अतीक बस्तावी ने छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि समाज में न्याय और अधिकारों की रक्षा के लिए अभी बहुत कार्य शेष है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे भविष्य की चुनौतियों के लिए स्वयं को तैयार करें और न्याय, समानता तथा मानवाधिकारों के दूत बनें।

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