“चैरिटेबल ट्रस्ट के नाम पर करोड़ों का खेल! डॉक्टर आमोद कुमार सचान पर फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप”

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ट्रस्ट डीड में कथित हेरफेर कर खोले गए गुप्त बैंक खाते, शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं — पुलिस पर उठे सवाल

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। समाज सेवा और गरीबों के इलाज के नाम पर स्थापित एक चैरिटेबल ट्रस्ट अब बड़े वित्तीय घोटाले के आरोपों में घिरता नजर आ रहा है। हिंद चैरिटेबल ट्रस्ट से जुड़े वरिष्ठ ट्रस्टी बृज किशोर सिंह ने ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. आमोद कुमार सचान पर ट्रस्ट डीड में कथित कूटरचना कर करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है।

प्रार्थना पत्र के अनुसार, वर्ष 2004 में स्थापित ट्रस्ट का उद्देश्य समाज के कमजोर वर्ग को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना था। सभी ट्रस्टियों ने भरोसा जताते हुए ट्रस्ट का संचालन डॉ. सचान को सौंप दिया, लेकिन अब आरोप है कि इसी विश्वास का फायदा उठाकर बड़े स्तर पर वित्तीय अनियमितता की गई।

🔴 फर्जी दस्तावेजों से बैंक खाते खोलने का आरोप

शिकायत में दावा किया गया है कि मूल ट्रस्ट डीड में कथित छेड़छाड़ कर एचडीएफसी बैंक में दो गुप्त खाते खोले गए। इन खातों के जरिए भारी रकम की एफडी, बैंक गारंटी और क्रेडिट लिमिट ली गई, जिसकी जानकारी अन्य ट्रस्टियों को नहीं दी गई।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि संशोधित दस्तावेजों में अन्य ट्रस्टियों के नाम हटाकर डॉ. आमोद कुमार सचान और उनकी पत्नी को प्रमुख पदों पर दिखाया गया।

⚠️ करोड़ों के दुरुपयोग की आशंका

प्रार्थी का कहना है कि पूरे मामले में करोड़ों रुपये के दुरुपयोग की संभावना है और यह एक सुनियोजित साजिश हो सकती है। शिकायत में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराओं में केस दर्ज करने की मांग की गई है।

🚨 पुलिस पर भी सवाल

हैरानी की बात यह है कि थाना कैसरबाग में लिखित शिकायत और पुलिस आयुक्त को रजिस्टर्ड डाक भेजने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज नहीं हुई। इससे कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

🧨 कोर्ट की शरण में पहुंचे ट्रस्टी

कार्रवाई न होने से निराश ट्रस्टी ने अब अदालत का दरवाजा खटखटाया है और न्यायालय से एफआईआर दर्ज कराने तथा सख्त जांच के आदेश की मांग की है।

👉 अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ वित्तीय घोटाले तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि समाज सेवा के नाम पर भरोसे के साथ हुई बड़ी धोखाधड़ी के रूप में सामने आ सकता है।

👉 अब सबसे बड़ा सवाल —
क्या गरीबों की सेवा के नाम पर चल रहा था करोड़ों का खेल? और कब जागेगा प्रशासन?

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