उद्यान योजनाओं की समीक्षा बैठक या औपचारिकता? ज़मीनी हकीकत पर फिर उठे सवाल

किसानों तक लाभ पहुँचने में देरी, आलू भंडारण और निर्यात तैयारियों पर अनिश्चितता बरकरार

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। प्रदेश में उद्यानिकी को किसानों की आय वृद्धि का मजबूत आधार बनाने के दावे एक बार फिर समीक्षा बैठकों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। सोमवार को उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश व्यापार एवं कृषि निर्यात राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिनेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में उद्यान विभाग की योजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, लेकिन यह बैठक भी बीते वर्षों की तरह ज़मीनी समस्याओं की पुनरावृत्ति बनकर रह गई।

बैठक में ड्रॉप मोर क्रॉप–माइक्रो इरीगेशन, एकीकृत बागवानी विकास कार्यक्रम, मुख्यमंत्री राज्य औद्यानिक विकास योजना, फलपट्टी विकास योजना, पान उत्पादन प्रोत्साहन योजना जैसी योजनाओं की समीक्षा की गई। हालांकि, इन योजनाओं का वास्तविक लाभ अब तक बड़ी संख्या में पात्र किसानों तक नहीं पहुँच सका है, जिसे लेकर किसान संगठनों में लगातार नाराज़गी बनी हुई है।

मंत्री द्वारा योजनाओं को “समयबद्ध और पारदर्शी” तरीके से लागू करने के निर्देश कोई नए नहीं हैं। पूर्व में भी ऐसे निर्देश कई बैठकों में दिए जा चुके हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अब भी आवेदन लंबित, अनुदान भुगतान में देरी, और तकनीकी प्रक्रियाओं की जटिलता किसानों के लिए बड़ी बाधा बनी हुई है। विशेषकर छोटे और सीमांत किसान डिजिटल प्रक्रियाओं के कारण योजनाओं से बाहर रह जा रहे हैं।

आलू भंडारण को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। मंत्री ने शीतगृहों में तैयारी पूर्ण करने के निर्देश दिए, जबकि हर वर्ष खुदाई के समय किसानों को भंडारण शुल्क, स्थान की कमी, और मनमानी शर्तों का सामना करना पड़ता है। निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा जरूर हुई, लेकिन इसके लिए न तो ठोस बाजार रणनीति सामने आई और न ही किसानों को न्यूनतम समर्थन जैसी कोई गारंटी।

निर्यातोन्मुखी फसलों, कोल्ड स्टोरेज, पैक हाउस और लॉजिस्टिक्स के विस्तार की बात वर्षों से की जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर इन बुनियादी ढाँचों की स्थिति बेहद सीमित है। कई जिलों में हाईटेक नर्सरियाँ कागज़ों में संचालित हैं, जबकि “पर ब्लॉक वन क्रॉप” जैसी योजनाएँ प्रचार तक सीमित रह गई हैं।

कुल मिलाकर, बैठक में घोषणाएँ और निर्देश तो दिए गए, लेकिन किसानों की मूल समस्याओं — उत्पाद का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, भंडारण और बाजार तक सीधी पहुँच — पर कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। सवाल यह है कि क्या ये समीक्षा बैठकें वास्तव में सुधार का माध्यम बनेंगी या फिर फाइलों में दर्ज औपचारिकताओं तक ही सीमित रहेंगी?

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