वक्फ बोर्ड के कर्ताधर्ता, रहनुमा नहीं बल्कि वक्फ के दलाल हैं-अंनीस मंसूरी

 

 

लखनऊ। वक्फ संशोधन अधिनियम 2024 के विरोध में 17 मार्च को दिल्ली में हुए ऐतिहासिक प्रदर्शन में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कथित रहनुमा और देश के सबसे बड़े वक्फ बोर्ड—उत्तर प्रदेश सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्षों की गैरमौजूदगी—ने उनकी नीयत और प्रतिबद्धता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

 

पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा,

“वक्फ संपत्तियां पसमांदा मुसलमानों की अमानत हैं, लेकिन ये मुतवल्ली मौलाना और वक्फ बोर्ड के जिम्मेदार लोग अपने पदों का इस्तेमाल केवल सियासी फायदे और निजी स्वार्थों के लिए कर रहे हैं। जब वक्फ संपत्तियों को बचाने और कौम के हक की आवाज बुलंद करने का वक्त आया, तो ये लोग नदारद रहे। यह इस बात का साफ सुबूत है कि ये लोग सरकार की सरपरस्ती में ही अपना खेल खेल रहे हैं।”

 

उन्होंने आगे कहा,

“वक्फ संपत्तियों पर सरकार की दखलअंदाजी रोकने और उन्हें बचाने के लिए जब देशभर के मुसलमान सड़कों पर उतरे, तब तथाकथित मुस्लिम रहनुमा और उत्तर प्रदेश के वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष कहीं नजर नहीं आए। इससे साबित होता है कि ये चंद लोग वक्फ की मिल्कियत के रक्षक नहीं, बल्कि दलाल बन चुके हैं।”

 

अनीस मंसूरी ने मुस्लिम समाज से अपील करते हुए कहा कि,

“अब वक्त आ गया है कि कौम ऐसे दोगले मुतवल्लियों और वक्फ संपत्तियों की बंदरबांट करने वालों को पहचानें और उनका सामाजिक बहिष्कार करें। वक्फ बोर्ड में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया जाए, ताकि यह कौम की तरक्की में सही भूमिका निभा सके।”

 

उन्होंने ऐलान किया कि पसमांदा मुस्लिम समाज जल्द ही इस मुद्दे पर एक बड़ा आंदोलन करेगा, ताकि वक्फ संपत्तियों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।

 

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