भारतीय फार्माकोपिया को अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिली और 19 वैश्विक दक्षिणी देशों में मान्यता प्राप्त हुई: श्री जेपी नड्डा

श्री नड्डा ने कहा कि भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के फार्माकोविजिलेंस योगदान में 123वें से 8वें स्थान पर पहुंच गया है

भारतीय फार्माकोपिया 2026 में 121 नए मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं, जिनमें टीबी-रोधी, मधुमेह-रोधी और कैंसर-रोधी दवाओं का दायरा बढ़ाया गया है

भारतीय फार्माकोपिया 2026 में पहली बार ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन के लिए रक्त घटक मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री  जेपी नड्डा ने नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में भारतीय फार्माकोपिया 2026 (आईपी) 2026- भारत के औषधि मानकों की आधिकारिक पुस्तक के 10वें संस्करण का विमोचन किया। यह संस्‍करण दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता को मजबूत करने के भारत के निरंतर प्रयासों की एक कड़ी है। श्री नड्डा ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय फार्माकोपिया देश में दवाओं के लिए आधिकारिक मानक पुस्तक और भारत के फार्मास्यूटिकल्स नियामक ढांचे का आधार है। उन्होंने कहा कि भारतीय फार्माकोपिया का 10वां संस्करण वैज्ञानिक प्रगति, वैश्विक सर्वोत्तम विधियों और फार्मास्युटिकल और विनियमन में भारत के बढ़ते नेतृत्व को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारतीय फार्माकोपिया 2026 में 121 नए मोनोग्राफ शामिल किए गए हैं, जिससे मोनोग्राफ की कुल संख्या बढ़कर 3,340 हो गई है। उन्होंने आगे कहा कि तपेदिक रोधी, मधुमेह रोधी और कैंसर रोधी दवाओं के साथ-साथ आयरन सप्लीमेंट सहित प्रमुख चिकित्सीय श्रेणियों में कवरेज को काफी मजबूत किया गया है, जिससे विभिन्न राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के तहत उपयोग की जाने वाली दवाओं का व्यापक मानकीकरण सुनिश्चित होता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने फार्माकोविजिलेंस का उल्‍लेख करते हुए कहा कि ‘हाल के वर्षों में, भारतीय फार्माकोपिया के मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकृति मिली है क्योंकि यह भारत सरकार की स्वास्थ्य कूटनीति के अंतर्गत एक प्रमुख एजेंडा बन गया है।’ उन्होंने कहा कि भारतीय फार्माकोपिया को अब वैश्विक दक्षिण के 19 देशों में मान्यता प्राप्त है। श्री नड्डा ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) के अंतर्गत भारत के फार्माकोविजिलेंस कार्यक्रम (पीवीपी) की उल्लेखनीय प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्ष 2009-2014 के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के फार्माकोविजिलेंस डेटाबेस में योगदान में भारत वैश्विक स्तर पर 123वें स्थान पर था, लेकिन वर्ष 2025 में यह 8वें स्थान पर पहुंच गया है। आईपीसी और पीवीपी टीम की सराहना करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि यह उपलब्‍धि मजबूत फार्माकोविजिलेंस प्रणाली रोगी सुरक्षा, गुणवत्ता आश्वासन और सुदृढ़ नियामक निगरानी के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

 

 

 

श्री नड्डा ने औषधि और सौंदर्य प्रसाधन (द्वितीय संशोधन) नियम, 2020 के प्रावधानों के अनुसार, भारतीय फार्माकोपिया 2026 में पहली बार रक्त आधान चिकित्सा से संबंधित 20 रक्त घटक मोनोग्राफ को शामिल करने पर जोर दिया। श्री नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में सरकार ने स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों और नियामक संस्थानों को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय भारतीय फार्माकोपिया 2026 इसी निरंतर प्रयास और गुणवत्ता, पारदर्शिता और जन कल्याण पर सरकार के अटूट ध्यान का प्रतिबिंब है। श्री नड्डा ने भारतीय फार्माकोपिया आयोग और भारतीय फार्माकोपिया के 10वें संस्करण को प्रकाशित करने में शामिल सभी हितधारकों को बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय फार्माकोपिया 2026 दवा गुणवत्ता मानकों को और मजबूत करेगा, भारत के नियामक ढांचे को सुदृढ़ करेगा और वैश्विक दवा क्षेत्र में देश की स्थिति को सुदृढ़ बनाएगा। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने इस अवसर पर कहा कि भारतीय फार्माकोपिया 2026 का प्रकाशन भारत के औषध नियामक तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश भर में सुरक्षित, प्रभावी और गुणवत्ता-सुनिश्चित दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक सुदृढ़, विज्ञान-आधारित औषध फार्माकोपिया आवश्यक है। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि फार्माकोपिया का निरंतर अद्यतन और सामंजस्य वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं, रोगी सुरक्षा और नियामक उत्कृष्टता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, साथ ही वैश्विक औषध आपूर्ति श्रृंखला में देश की बढ़ती भूमिका का समर्थन भी करता है।

भारतीय औषध संहिता के बारे में

भारतीय फार्माकोपिया (आईपी) का प्रकाशन भारतीय फार्माकोपिया आयोग (आईपीसी) द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से औषधि एवं सौंदर्य प्रसाधन अधिनियम 1940 की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए किया जाता है। आईपी भारत में बनाई गई या विपणन की जाने वाली दवाओं के लिए आधिकारिक मानक निर्धारित करती है और इस प्रकार दवाओं की गुणवत्ता के नियंत्रण और आश्वासन में योगदान देती है। आईपी के मानक आधिकारिक और कानूनी रूप से लागू करने योग्य हैं। इसका उद्देश्य देश में दवाओं के निर्माण, निरीक्षण और वितरण के लाइसेंसिंग में सहायता करना है।

भारतीय फार्माकोपिया चर्चा समूह (पीडीजी) के सदस्य के रूप में, भारतीय फार्माकोपिया मोनोग्राफ और सामान्य अध्यायों के सामंजस्य के लिए यूरोपीय, जापानी और संयुक्त राज्य अमरीका की फार्माकोपिया के साथ सक्रिय रूप से सहयोग कर रही है। भारतीय फार्माकोपिया की सामान्य आवश्यकताओं को अंतर्राष्ट्रीय सामंजस्य परिषद (आईसीएच) के मानकों के अनुरूप बनाया गया है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत औषध गुणवत्ता मानकों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है। इस कार्यक्रम में औषधि नियंत्रक जनरल डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री हर्ष मंगला, भारतीय फार्माकोपिया आयोग के सचिव-सह-वैज्ञानिक निदेशक डॉ. वी. कलैसेल्वन और अन्य विशेषज्ञ भी उपस्थित थे।

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