करप्शन पर योगी का एक्शन

उत्तर प्रदेश में अपने दूसरे कार्यकाल की शुरूआत के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भ्रष्टïाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिया है। योगी सरकार अपने पहले कार्यकाल में भी भ्रष्टïाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाईयों को लेकर चर्चा में रही थी।

योगी के करप्शन के खिलाफ एक्शन से भ्रष्टïचारियों में हलचल मची हुई है। भ्रष्टïाचार में डूबे लोगों को एक बार फिर से अपने चारो ओर से कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। योगी अपने दूसरे कार्यकाल में करप्शन के खिलाफ सख्त एक्शन ले रहे हैं। योगी की एक सख्त प्रशासक की छवि यूपी की जनता को रास आ रही है तभी 37 साल के लंबे समय के बाद योगी ऐसे मुख्यमंत्री बने हैं जो अपना एक कार्यकाल का समय पूरा करने के साथ ही दोबारा यूपी की बागडोर संभाल रहे हैं। पिछले कार्यकाल में योगी आदित्यनाथ ने करप्शन के खिलाफ जंग छेड़ रखी थी। कई बड़े नौकरशाहों से लेकर सरकारी सिस्टम में लंबे समय भ्रष्टïाचार करते आ रहे लोगों को चिन्हित कर उन पर सख्त कार्रवाई की गई थी। योगी अपने दूसरे कार्यकाल में भी वही तेवर बरकरार रखे हुए हैं।
अपने दूसरे कार्यकाल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते दिनों सोनभद्र के डीएम टीके शिबू और गाजियाबाद के एसएसपी पवन कुमार को निलंबित कर दिया जबकि इससे पहले के कार्यकाल में सीएम योगी आदित्यनाथ 17 आईपीएस अफसरों के खिलाफ भ्रष्टाचार और शासकीय दायित्वों की अवहेलना करने को लेकर कार्यवाही कर चुके हैं। वहीं पिछले कार्यकाल में राज्य सरकार ने कई आईएएस अफसरों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करते हुए सस्पेंड किया था। इसमें से कई अफसर अब रिटायर हो चुके हैं।
राज्य में सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को सख्त हिदायत दी थी और कहा था कि वह भ्रष्टाचार के मामले में एक्शन लेंगे। लिहाजा अफसर इस बात को ध्यान में रखें। उन्होंने कहा था कि सबकी जिम्मेदारी तय है और जो भी इसकी अवहेलना करेगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। लिहाजा खनन और निर्माण कार्य में भ्रष्टाचार और चुनाव के दौरान काम न करने के आरोप में सोनभद्र के डीएम को निलंबित कर दिया गया है। वहीं राज्य सरकार ने गाजियाबाद के एसएसपी को कर्तव्यों का पालन नहीं करने के लिए सस्पेंड किया किया गया है। राज्य सरकार ने चंद्रविजय सिंह को सोनभद्र का नया डीएम बनाया गया है। वह अब तक मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के प्रबंध निदेशक थे।
असल में राज्य सरकार ने साफ कर दिया था कि भ्रष्टाचार और सरकारी कार्यों में ढिलाई बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिबू को लेकर राज्य सरकार के पास शिकायतें थी और इन शिकायतों की जांच वाराणसी के मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल कर रहे थे। सस्पेंशन के बाद टीके शिबू को राजस्व परिषद लखनऊ से अटैच कर दिया गया है। इसके साथ ही गाजियाबाद के एसएसपी पवन कुमार को अपराध न रोकने और ड्यूटी न निभाने के आरोप में सस्पेंड किया गया है।
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ की पिछली सरकार में 17 आईपीएस अफसरों पर गाज गिरी थी। राज्य सरकार ने शासकीय दायित्वों को पूरा ना करने और भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के कारण 17 आईपीएस अफसरों के खिलाफ कार्यवाही करते हुए उन्हें सस्पेंड किया था। वहीं महोबा के एसपी रहे मणिलाल पाटीदार के खिलाफ व्यापारी की आत्महत्या के मामले में सस्पेंशन की कार्यवाही की गई थी। वह अभी भी फरार हैं।

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