भ्रष्टाचार पर योगी का हंटर

एक ओर जहां सूबे की योगी सरकार भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है तो वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे भ्रष्टाचारियों सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। विगत दिनों जिस तरह से यूपी के बलिया जिले में इंटरमीडिएट का इंग्लिश का पेपर लीक हुआ उसने एक बार फिर से परीक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा दिया है। लेकिन इस पूरे कांड की जड़ में देखे तो यहां पर भी भ्रष्टाचार ही इसका मूल है। जिसके चलते इस जिले के डीआईओएस को इस पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया गया है।
बलिया पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तार डीआइओएस बृजेश मिश्र अकूत संपत्ति का मालिक निकला है। प्रयागराज के सिविल लाइंस स्थित हनुमत निकेतन मंदिर के पास उसका करोड़ों रुपये कीमत का आलीशान बंगला भी है। खास बात तो यह है कि उसने यह बंगला प्रयागराज में 2007 से 2009 तक बीएसए के पद पर तैनाती के दौरान ही खरीदा था। इस तैनाती के दौरान तत्कालीन डीएम आशीष कुमार गोयल ने भ्रष्टाचार के मामले में उसके आवास पर छापा मारा था। हालांकि वहां से कैश बरामद नहीं हुआ लेकिन पूरे मामले में खूब किरकिरी हुई थी।
मूलत: बिहार के रहने वाले बृजेश मिश्र की गिनती भ्रष्ट और दागी छवि के अधिकारी के रूप में होती है। बृजेश शिक्षा विभाग में अपने सांठगांठ के लिए भी जाना जाता है। प्रयागराज के अलावा प्रतापगढ़, हरदोई, जौनपुर में भी इसकी तैनाती रही। बृजेश का नाम वर्ष 2011 में भी सुर्खियों में आया था। जब उसकी पत्नी अन्विता की तैनाती प्रयागराज के अल्पसंख्यक विद्यालय (नूरजहां उच्चतर माध्यमिक विद्यालय) में 21 अप्रैल 2011 को सहायक अध्यापक के पद पर हुई। इसके लिए बीएसए कार्यालय से 15 अप्रैल 2011 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया था। इस दौरान प्रयागराज के बीएसए बृजेश ही थे। उन पर आरोप लगा था कि मनमाने तरीके से उन्होंने पत्नी की नियुक्ति कराई है। हालांकि, मीडिया में जो खबरें आ रही हैं उनके मुताबिक विद्यालय के प्रबंधक डा. अशफाक अहमद का कहना है कि यह बात सही है कि जिस समय अन्विता की नियुक्ति हुई थी, उनके पति ही बीएसए के पद पर कार्यरत थे लेकिन नियुक्ति नियम और कानून के तहत की गई है। पद का अनुमोदन लिया गया था और दो अखबारों में विज्ञप्ति भी जारी हुई थी।
कई अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था जिसमें से अंतिम रूप से तत्कालीन बीएसए बृजेश मिश्रा की पत्नी अन्विता ईश्वर का चयन सहायक अध्यापक के पद के लिए किया गया था। इस मामले में गाजीपुर के शिवबचन पांडेय ने बृजेश पर पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया था। शिव बचन गाजीपुर के गडार गांव के रहने वाले हैं। उनकी शिकायत पर बेसिक शिक्षा निदेशक प्रयागराज ने बीएसए से रिपोर्ट तलब की थी। इस प्रकरण में बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी का कहना है कि 15 अप्रैल 2011 को तत्कालीन बीएसए बृजेश मिश्र द्वारा अन्विता की नियुक्ति का कोई अनुमोदन नहीं प्रदान किया गया है। इसके आधार पर उन्हें क्लीनचिट मिल गई थी। हरदोई में बीएसए रहते हुए बृजेश के पास डीआइओएस का भी चार्ज था। यहां मनमाने ढंग से बोर्ड परीक्षा के केंद्र बनाने और शिक्षक भर्ती मामले में भी वह फंसे थे। लेकिन अपनी ऊंची पहुंच और रसूख के चलते बृजेश हमेशा ही शिक्षा विभाग में मलाईदार पदों पर रहे। बलिया में डीआइओएस पद पर तैनाती से पहले प्रयागराज में सहायक शिक्षा निदेशक पत्राचार के पद पर तैनाती थी।

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