राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र . तुलसी गौरव सम्मान से सम्मानित कुटिया निर्माण, भरत-राम मिलन, भरत का चरणपादुका लेना लीला ने मंत्र मुग्ध किया

– रामोत्सव 2023 पांचवा दिन
धीरज गुप्ता

भारत की सबसे प्राचीनतम रामलीला समिति, श्रीराम लीला समिति ऐशबाग लखनऊ के तत्वावधान में रामलीला मैदान के तुलसी रंगमंच पर चल रही रामलीला के आज पांचवें दिन कुटिया निर्माण लीला, सीता स्वप्न दर्शन, भरत का वन प्रस्थान, निषाद राज भरत संवाद, भरत-राम मिलन, भरत का चरणपादुका लेकर वापस जाना, भरत का महल त्याग देना, नंदीग्राम गमन, कैकई भरत संवाद एवं कैकई विलाप लीला हुई।

इसके पूर्व मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र ने रामलीला का विधिवत उदघाटन दीप प्रज्जवलित कर किया। इस अवसर पर श्री राम लीला समिति के अध्यक्ष हरीश चन्द्र अग्रवाल और सचिव पं आदित्य द्विवेदी ने मुख्य अतिथि राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र, अति विशिष्ट अतिथि जय वीर सिंह पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उ.प्र., विशिष्ट अतिथि डॉ नीरज बोरा विधायक, मुकेश शर्मा को पुष्प गुच्छ, अंग वस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर अरविन्द योगी को तुलसी गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में प्रवीण मिश्रा, राजीव बाजपेयी, सुधीर मिश्रा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

रामलीला से पूर्व आशा नृत्यांगना फाउंडेशन, अक्षरा आर्ट एण्ड डांस अकादमी और तरंगिणी डांस अकादमी के कलाकारों ने भक्तिभावना से परिपूर्ण नृत्य की प्रस्तुतियां दी।

आज की रामलीला का आरम्भ कुटिया निर्माण लीला से हुआ, इस प्रसंग में भगवान राम जब चित्रकूट पहुंचते हैं तो उनकी मुलाकात वाल्मीकि ऋषि से होती है और वह राम जी के रहने के लिए कुटिया के निर्माण के लिए स्थान का चयन करके कहते हैं कि आप लोग यहां पर कुटिया का निर्माण करें। सबसे पहले रहने के लिए माता सीता, राम जी से कहती हैं कि आप और लक्ष्मण वन से बांस और घास फूस आदि ले आइए, सीता जी के आग्रह पर राम और लक्ष्मण वन जाकर बांस, घास और पत्ते आदि लाते हैं और कुटिया का निर्माण करते हैं।

इस लीला के उपरान्त भरत का वन प्रस्थान, निषाद राज भरत संवाद, भरत राम मिलन लीला हुई, इस प्रसंग में भरत, दशरथ की तीनों रानियां, गुरू वशिष्ठ और कुछ अयोध्यावासी प्रजा राम की कुटिया के पास उनको अपने साथ लेने के लिए पहुंचते हैं। यह देखकर निषादराज अन्य लोगों को लेकर, कुटिया के पास आने वाले लोगों को घेर लेते हैं और उनको आगे बढ़ने से रोकते हैं। वाद-विवाद होता देख भगवान राम, निषाद से कहते हैं कि यह क्या हो रहा है, फिर निषाद कहते हैं कि यह युवक कुछ लोगों को लेकर आपकी कुटीर के पास आ रहा था तो मैंने इसे रोका कि, कहीं यह आप पर हमला न करे, इस बात को सुनकर राम उस युवक के पास जाते हैं तो उसे देखकर हैरान हो जाते हैं कि वह उनके छोटे भाई भरत हैं, दोनों लोग गले मिलते हैं और भरत, राम जी से कहते हैं कि आप अयोध्या वापस चलें, लेकिन राम कहते हैं कि मैं अपने पिता के वचनों का निरादर नहीं कर सकता, इसलिए आप लोग अयोध्या वापस चले जाइए।

इस लीला के उपरान्त भरत का चरणपादुका लेकर वापस जाना लीला हुई, इस प्रसंग में भरत, राम जी से कहते हैं कि मैं ऐसे वापस अयोध्या नही जाऊंगा, आप अपनी चरणपादुका मुझें प्रदान कर दीजिए, इस बात को सुनकर राम जी अपनी चरणपादुका भरत को देते हैं, जिसको भरत अपने सिर पर रखकर अयोध्या वापस चले जाते हैं।

रामलीला के अगले सोपान में भरत का महल त्याग देना और नन्दीग्राम गमन लीला हुई, इस प्रसंग में जब भरत, राम जी की चरणपादुका लेकर अयोध्या पहुंचते हैं, तो वह राजगद्दी पर राम जी की चरणपादुका रखकर राजकाज आरम्भ करते हैं, इतना करने के बाद भरत, राम जी के प्रेम में विहृवल होकर मानसिक रूप से विक्षिप्त हो जाते हैं और एक सन्यासी के रूप में अपना नन्दीग्राम में रहने लगते हैं, यह लीला देखकर दर्शक भाव-विभोर हो जाते हैं।

इस लीला के उपरान्त कैकेई भरत संवाद और कैकेई विलाप लीला हुई, इस प्रसंग में कैकेई, भरत से कहती हैं कि यह सब क्या कर रहे हो, भरत अपनी राजगद्दी संभालों। इस बात को सुनकर भरत और कैकेई में काफी विवाद होता है और कैकेई रोती-बिलखती हुई भरत को छोड़कर महल से बाहर निकल जाती हैं।
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