“भारत में डिजाइन, दुनिया के लिए डिजाइन” विज़न को मिलेगी नई गति

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। भारत के डिजाइन संरक्षण ढांचे को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT) ने डिजाइन अधिनियम, 2000 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए विभाग ने एक अवधारणा पत्र (Concept Paper) जारी किया है, जिस पर हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।

यह पहल प्रधानमंत्री के “भारत में डिजाइन, दुनिया के लिए डिजाइन” के विज़न को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य डिजिटल नवाचार, वर्चुअल उत्पादों और उभरते उपभोक्ता अनुभवों के अनुरूप भारत के डिजाइन कानून को प्रासंगिक बनाना है।

🔹 अंतरराष्ट्रीय संधियों से जुड़ने का प्रस्ताव

अवधारणा पत्र में भारत को

  • रियाद डिजाइन कानून संधि (DLT)

  • औद्योगिक डिजाइनों के अंतरराष्ट्रीय पंजीकरण से संबंधित हेग समझौते

में शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे भारतीय डिजाइनों को वैश्विक मंच पर बेहतर संरक्षण मिल सके।

🔹 प्रस्तावित प्रमुख सुधार

अवधारणा नोट के अनुसार, डिजाइन अधिनियम में निम्नलिखित अहम बदलाव प्रस्तावित हैं:

  • ‘आर्टिकल’ और ‘डिजाइन’ की परिभाषा में संशोधन कर वर्चुअल डिजाइनों को कानूनी संरक्षण

  • 12 महीने की ग्रेस पीरियड (छूट अवधि) की शुरुआत

  • डिजाइन प्रकाशन को 30 महीने तक स्थगित करने का विकल्प

  • डिजाइन कानून संधि के अनुरूप समयसीमा में राहत प्रावधान

  • वैधानिक क्षतिपूर्ति (Statutory Damages) का प्रावधान

  • डिजाइन संरक्षण की अवधि में संशोधन

  • एक ही आवेदन में एक से अधिक डिजाइनों की फाइलिंग की सुविधा

  • आवेदनों के वर्गीकरण (Classification) का विकल्प

  • DLT और हेग समझौते के अनुरूप अन्य संरचनात्मक सुधार

🔹 हितधारकों से सुझाव आमंत्रित

डीपीआईआईटी ने उद्योग, डिजाइनर्स, स्टार्टअप्स, कानूनी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से इन प्रस्तावों पर टिप्पणियाँ और सुझाव आमंत्रित किए हैं, ताकि अंतिम संशोधन को और प्रभावी बनाया जा सके।

अवधारणा पत्र सार्वजनिक परामर्श हेतु डीपीआईआईटी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है। https://www.dpiit.gov.in/static/uploads/2026/01/791a71ebde47d93b67560f7394be2fec.pdf

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