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बैंक ऑफ महाराष्ट्र पर आरबीआई ने जुर्माना लगाया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 8 अगस्त, 2024 के एक आदेश द्वारा बैंक ऑफ महाराष्ट्र (बैंक) पर ‘बैंक ऋण वितरण के लिए ऋण प्रणाली’, ‘बैंकों में साइबर सुरक्षा ढांचा’ और ‘अपने ग्राहक को जानें’ पर आरबीआई द्वारा जारी कुछ निर्देशों का पालन न करने के लिए ₹1,27,20,000/- (एक करोड़ सत्ताईस लाख और बीस हजार रुपये मात्र) का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। ये जानकारयिां भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक पुनीत पंचोली ने जारी एक बयान में दी।

पुनीत पंचोली ने बताया कि 31 मार्च, 2023 तक बैंक की वित्तीय स्थिति के संदर्भ में पर्यवेक्षी मूल्यांकन (आईएसई 2023) के लिए वैधानिक निरीक्षण और मई 2023 में बैंक की सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) जांच आरबीआई द्वारा की गई थी। आरबीआई के निर्देशों का पालन न करने के पर्यवेक्षी निष्कर्षों और उस संबंध में संबंधित पत्राचार के आधार पर, बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था जिसमें उसे कारण बताने की सलाह दी गई थी कि उक्त निर्देशों का पालन करने में विफलता के लिए उस पर अधिकतम जुर्माना क्यों न लगाया जाए। नोटिस पर बैंक के जवाब, व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान किए गए मौखिक प्रस्तुतियों और उसके द्वारा किए गए अतिरिक्त प्रस्तुतियों की जांच पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने अन्य बातों के साथ-साथ पाया कि बैंक के खिलाफ निम्नलिखित आरोप कायम थे, जो मौद्रिक जुर्माना लगाने के योग्य थे। बैंक (प) यह सुनिश्चित करने में विफल रहा कि न्यूनतम बकाया ‘ऋण घटक’, कम से कम, कुछ उधारकर्ताओं के लिए स्वीकृत निधि आधारित कार्यशील पूंजी सीमा का निर्दिष्ट प्रतिशत था, (पप) सभी वितरण चौनलों में धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन प्रणाली को लागू करने में विफल रहा (पपप) प्रत्येक ग्राहक के लिए एक विशिष्ट ग्राहक पहचान कोड (यूसीआईसी) के बजाय कुछ ग्राहकों को कई ग्राहक पहचान कोड आवंटित किए थे और (पअ) कुछ छोटे खातों में परिचालन की अनुमति दी थी जो नियामक आवश्यकता को पूरा नहीं करते थे।

मुख्य महाप्रबंधक ने बताया कि यह कार्रवाई नियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता पर निर्णय लेना नहीं है। इसके अलावा, मौद्रिक जुर्माना लगाना आरबीआई द्वारा बैंक के खिलाफ शुरू की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई के प्रतिकूल नहीं है।

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