गायत्री प्रसाद प्रजापति के सहयोगी अनीस  मंसूरी ने मोदी-योगी राज में पसमांदा मुसलमानों का जीना दूभर के लगायें आरोप

 

– हरदुआगंज की दरिंदगी पर अनीस मंसूरी का तीखा बयान

 

लखनऊ, 27 मई।

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ ज़िले के हरदुआगंज थाना क्षेत्र अंतर्गत एहलादतपुर गांव में चार पसमांदा मुस्लिम युवकों—अकील (35), नदीम (32), अरबाज (38) और कदीम (43)—को गोमांस तस्करी के झूठे आरोप में गोरक्षा दल से जुड़े उपद्रवियों ने बर्बरता से पीटा और उनके वाहन को आग के हवाले कर दिया। इस नृशंस घटना की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए गायत्री प्रसाद प्रजापति के सहयोगी पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने इसे ‘मॉब लिंचिंग’ नहीं, बल्कि “पूर्व नियोजित हत्या और पसमांदा समाज के विरुद्ध सुनियोजित साजिश” बताया है।

 

श्री मंसूरी ने कहा कि इस हमले का शिकार बने चारों व्यक्ति एक अधिकृत स्लॉटर हाउस से मीट खरीदकर अपनी दुकानों की ओर जा रहे थे, और उनके पास संबंधित कागजात भी मौजूद थे। बावजूद इसके, गोरक्षा के नाम पर उन्हें घेरकर न सिर्फ पीटा गया बल्कि फिरौती मांगी गई और अंततः वाहन जला दिया गया।

 

उन्होंने भाजपा और आरएसएस को इस हमले का प्रेरक और संरक्षक करार देते हुए कहा, “जो गोरक्षक बनकर घूम रहे हैं, वे वास्तव में संविधान के गुनहगार हैं। और जो सत्ता में हैं, वे इस पूरे अपराध के मौन भागीदार।”

 

श्री मंसूरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सीधा निशाने पर लेते हुए कहा:

“पसमांदा मुसलमान सिर्फ चुनावी पोस्टर नहीं हैं। चुनाव आते ही इनके घरों में झाड़ू लगाना और चुनाव जाते ही इन्हें ‘गोकश’ बताकर मरवा देना, ये कैसी राजनीति है? ये लोकतंत्र नहीं, बहुसंख्यकवाद की तानाशाही है।”

 

उन्होंने यह भी कहा कि आज उत्तर प्रदेश में कानून नहीं, भीड़ राज कर रही है। और अगर पीड़ित मुसलमान हो, तो पुलिस, प्रशासन और मीडिया – सब चुप्पी साध लेते हैं।

 

अनीस मंसूरी की प्रमुख मांगें:

इस घटना को हत्या का प्रयास, सांप्रदायिक विद्वेष और आतंक फैलाने की धाराओं में दर्ज किया जाए।

सभी आरोपियों को एनएसए के तहत जेल भेजा जाए।

पीड़ितों को ₹50 लाख मुआवज़ा, सम्पूर्ण चिकित्सा सुविधा और राजकीय सुरक्षा दी जाए।

गोरक्षा के नाम पर हिंसा फैलाने वाले सभी संगठनों पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाए।

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री स्वयं पीड़ितों से मिलकर माफी मांगें।

श्री मंसूरी ने दो टूक कहा:

“यह कोई इत्तेफाक नहीं, यह पसमांदा समाज को डराने की सुव्यवस्थित मुहिम है। लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं। ये लड़ाई संविधान और इंसाफ की है और इसे हम सड़क से संसद तक लड़ेंगे।”

 

उन्होंने सरकार को चेताया कि यदि इस मामले में कार्रवाई नहीं हुई तो पसमांदा समाज देशभर में जनसत्याग्रह और आंदोलन छेड़ेगा।

 

अंत में श्री मंसूरी ने कहा “इतिहास गवाह रहेगा कि जब इंसानियत का गला घोंटा जा रहा था, तब सत्ता मुस्कुरा रही थी।”

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