एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार जनवरी 2026 के दौरान अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (Scheduled Commercial Banks – SCBs) की ऋण दरों में नरमी दर्ज की गई है, जबकि जमा दरों में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यह आंकड़े क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और लघु वित्त बैंकों को छोड़कर अन्य अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों से प्राप्त किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 में एससीबी के नए रुपये ऋणों पर भारित औसत उधार दर (WALR) घटकर 8.28 प्रतिशत रह गई, जो नवंबर 2025 में 8.71 प्रतिशत थी। इससे संकेत मिलता है कि बैंकों द्वारा नए कर्ज पर ब्याज दरों में राहत दी जा रही है, जिससे उद्योग, व्यापार और खुदरा कर्ज लेने वालों को लाभ मिलने की संभावना है।
इसी तरह, बकाया रुपये ऋणों पर WALR भी नवंबर 2025 के 9.21 प्रतिशत से घटकर दिसंबर 2025 में 9.06 प्रतिशत पर आ गई। यह गिरावट दर्शाती है कि मौजूदा ऋणों पर भी ब्याज बोझ में धीरे-धीरे कमी आ रही है।
ऋण दरों के एक प्रमुख संकेतक एक वर्षीय निधि की सीमांत लागत आधारित ऋण दर (MCLR) की माध्यिका में भी कमी दर्ज की गई है। दिसंबर 2025 में 8.45 प्रतिशत रही एक वर्षीय MCLR जनवरी 2026 में घटकर 8.40 प्रतिशत हो गई, जिससे आने वाले महीनों में ऋण दरों में और नरमी की संभावना बढ़ गई है।
दूसरी ओर, जमा दरों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। नई रुपये मीयादी जमाओं पर भारित औसत घरेलू मीयादी जमा दर (WADTDR) दिसंबर 2025 में 5.67 प्रतिशत रही, जो नवंबर 2025 में 5.59 प्रतिशत थी। इससे यह संकेत मिलता है कि नई जमा पर बैंकों ने मामूली बढ़ोतरी की है, जिससे जमाकर्ताओं को सीमित राहत मिली है।
हालांकि, बकाया रुपये मीयादी जमाओं पर WADTDR में गिरावट दर्ज की गई है। यह दर नवंबर 2025 में 6.73 प्रतिशत से घटकर दिसंबर 2025 में 6.68 प्रतिशत रह गई, जो दर्शाता है कि पुरानी जमाओं पर औसत ब्याज दर में कमी आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऋण दरों में नरमी से आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है, जबकि जमा दरों में स्थिरता बैंकों की फंडिंग लागत को संतुलित रखने में सहायक होगी। यह रुझान मौद्रिक नीति के प्रभावी संचरण की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
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