­­ई-वाहनों का संवर्धन

पीएम ई-ड्राइव योजना का उद्देश्य देश में 10,900 करोड़ रुपए की इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ाना और कई प्रमुख रणनीतियों के माध्यम से देश के पर्यावरणीय लक्ष्यों में योगदान देना है। यह योजना 31 मार्च, 2026 तक उपलब्ध है। इस योजना का उद्देश्य निम्नलिखित तरीके से अपने उद्देश्य को प्राप्त करना है :

  1. ईवी को तेजी से अपनाना : इस योजना का उद्देश्य मांग प्रोत्साहन के माध्यम से उनकी अग्रिम लागत को कम करके इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग में तेजी लाना है।
  2. चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर : ईवी उपयोगकर्ताओं के बीच विश्वास पैदा करने और बढ़ते ईवी का समर्थन करने के लिए एक मजबूत चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क स्थापित करने पर महत्वपूर्ण ध्यान दिया जा रहा है।
  3. ईवी विनिर्माण इको-सिस्टम : यह योजना स्थानीय ईवी विनिर्माण इको-सिस्टम के विकास को बढ़ावा देती है, जिससे दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होती है और आयात पर निर्भरता कम होती है।
  4. सार्वजनिक परिवहन पर जोर : सार्वजनिक परिवहन और वाणिज्यिक उपयोग के लिए ईवी को प्राथमिकता देने का उद्देश्य आम जनता के लिए पर्यावरण के अनुकूल परिवहन विकल्प प्रदान करना है, जिससे समग्र उत्सर्जन में कमी आए।
  5. जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता में कमी : इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देकर, इस योजना का उद्देश्य जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता को कम करना और परिवहन क्षेत्र से उत्सर्जन को कम करना है।

उपभोक्ताओं और निर्माताओं दोनों के लिए पीएम ई-ड्राइव योजना के कार्यान्वयन से अपेक्षित मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

  1. उपभोक्ताओं के लिए : मांग प्रोत्साहन ईवी की शुरुआती लागत को कम करते हैं, जिससे वे ईवी खरीदारों के लिए अधिक सुलभ हो जाते हैं।
  2. निर्माताओं के लिए : मांग प्रोत्साहन सीधे ईवी की मांग को प्रोत्साहित करते हैं, जिससे बिक्री और उत्पादन की मात्रा बढ़ती है। चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) ईवी घटकों के स्थानीयकरण का समर्थन करता है, जिससे घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ावा मिलता है।

देश के विभिन्न क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) को अपनाने के लिए समर्थन और प्रोत्साहन देने के लिए योजना के अंतर्गत उठाए गए कदम इस प्रकार हैं:

  1. वित्तीय सहायता : ई-2डब्ल्यू और ई-3डब्ल्यू श्रेणियों के लिए वित्त वर्ष 2024-25 में 5,000 रुपए प्रति किलोवाट घंटा और वित्त वर्ष 2025-26 में 2,500 रुपए प्रति किलोवाट घंटा की मांग प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाती है। ये प्रोत्साहन एक्स-फैक्ट्री कीमत के 15 प्रतिशत तक सीमित हैं।
  2. ई-बसें : इस योजना में 14,028 ई-बसों के रोलआउट के लिए 4,391 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
  3. स्क्रैपिंग को प्राथमिकता देना : ई-बसों को तैनात करने के लिए अनुदान हेतु अधिकृत आरवीएसएफ के माध्यम से पुरानी एसटीयू बसों को स्क्रैप करने के बाद नई ई-बसें खरीदने वाले शहरों/राज्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

पीएम ई-ड्राइव योजना की सफल तैनाती और निगरानी सुनिश्चित करने और इसके प्रभाव को अधिकतम करने के लिए भारी उद्योग सचिव की अध्यक्षता में एक अंतर-मंत्रालयी अधिकार प्राप्त समिति, परियोजना कार्यान्वयन और मंजूरी समिति (पीआईएससी) का गठन किया गया है। पीआईएससी पीएम ई-ड्राइव योजना की समग्र निगरानी, ​​मंजूरी और कार्यान्वयन करता है। यह समिति कार्यान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी बाधा या कठिनाई को दूर करने के लिए भी जिम्मेदार है।

यह योजना इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग के विकास को सुगम बनाएगी तथा इस क्षेत्र में निम्नलिखित तरीके से रोजगार के अवसर पैदा करेगी:

  1. घरेलू विनिर्माण : चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम (पीएमपी) ईवी घटकों के प्रगतिशील स्थानीयकरण को अ­­­­­­­निवार्य बनाता है, जिससे घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा तथा आयात निर्भरता कम होगी।
  2. चार्जिंग अवसंरचना विकास : चार्जिंग अवसंरचना में निवेश से व्यवसायों तथा उद्यमियों के लिए स्थापना, रखरखाव तथा संचालन में अवसर पैदा होते हैं।
  3. स्थानीय विनिर्माण के लिए प्रोत्साहन : ईवी चार्जर के विनिर्माण में घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) का न्यूनतम 50 प्रतिशत स्थानीय घटक निर्माता के लिए एक बढ़ावा है।

इस्पात एवं भारी उद्योग राज्य मंत्री श्री भूपतिराजू श्रीनिवास वर्मा ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।

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