आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड के ऋण और अग्रिम – वैधानिक और अन्य पर आरबीआई ने प्रतिबंध किया

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आरबीआई ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड पर मौद्रिक जुर्माना लगाया
भारतीय रिज़र्व बैंक ने 27 मार्च, 2024 के एक आदेश द्वारा आईडीएफसी फर्स्ट बैंक लिमिटेड (बैंक) पर जारी किए गए कुछ निर्देशों का अनुपालन न करने के लिए ₹1.00 करोड़ (केवल एक करोड़ रुपये) का मौद्रिक जुर्माना लगाया है। भारतीय रिजर्व बैंक के मुख्य महाप्रबंधक योगेश दयाल ने जारी एक बयान में दी।
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मुख्य महाप्रबंधक योगेश दयाल ने बताया कि बैंक के पर्यवेक्षी मूल्यांकन (आईएसई 2022) के लिए वैधानिक निरीक्षण आरबीआई द्वारा 31 मार्च, 2022 को इसकी वित्तीय स्थिति के संदर्भ में किया गया था। आरबीआई के निर्देशों / वैधानिक प्रावधानों और उस संबंध में संबंधित पत्राचार के गैर-अनुपालन के पर्यवेक्षी निष्कर्षों के आधार पर बैंक को एक नोटिस जारी किया गया था जिसमें उसे कारण बताने की सलाह दी गई थी कि उक्त निर्देशों का पालन करने में विफलता के लिए उस पर जुर्माना क्यों नहीं लगाया जाना चाहिए। नोटिस पर बैंक के जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के दौरान की गई मौखिक प्रस्तुतियों पर विचार करने के बाद, आरबीआई ने अन्य बातों के साथ-साथ पाया कि बैंक के खिलाफ निम्नलिखित आरोप मौद्रिक दंड लगाने के लिए आवश्यक थे। बैंक ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए एक सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम को सावधि ऋण स्वीकृत किए थे, (प) परियोजनाओं की व्यवहार्यता और बैंक योग्यता पर उचित परिश्रम किए बिना यह सुनिश्चित करने के लिए कि परियोजनाओं से राजस्व धाराएं ऋण सेवा दायित्वों की देखभाल के लिए पर्याप्त थीं और (पप) उक्त सावधि ऋणों की चुकौती/सेवा बजटीय संसाधनों से की गई थी।
मुख्य महाप्रबंधक योगेश दयाल ने बताया कि यह कार्रवाई विनियामक अनुपालन में कमियों पर आधारित है और इसका उद्देश्य बैंक द्वारा अपने ग्राहकों के साथ किए गए किसी भी लेनदेन या समझौते की वैधता को प्रभावित करना नहीं है। इसके अलावा, मौद्रिक जुर्माना लगाने से आरबीआई द्वारा बैंक के खिलाफ शुरू की जाने वाली किसी भी अन्य कार्रवाई पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

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