अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए योजनाएं

सरकार अल्पसंख्यकों सहित हर वर्ग, खास तौर पर समाज के आर्थिक रूप से कमज़ोर और कम सुविधा प्राप्त वर्गों के कल्याण और उत्थान के लिए विभिन्न योजनाएं लागू करती है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय विशेष रूप से छह (6) केन्द्र अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के सामाजिक-आर्थिक और शैक्षिक सशक्तिकरण के लिए देश भर में विभिन्न योजनाएं लागू करता है। ये योजनाएँ अल्पसंख्यक समुदायों के कमज़ोर वर्गों के लिए हैं। मंत्रालय द्वारा कार्यान्वित की जाने वाली योजनाएँ/कार्यक्रम इस प्रकार हैं

शैक्षिक सशक्तिकरण योजनाएँ
प. मैट्रिक पूर्व छात्रवृत्ति योजना

पप. मैट्रिक के बाद छात्रवृत्ति योजना

पपप. योग्यता और साधन आधारित छात्रवृत्ति योजना

रोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण योजनाएं
प) प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन (पीएम विकास)। पीएम विकास योजना में निम्नलिखित घटक शामिल हैं जिनका लक्ष्य लक्षित लाभार्थियों के लिए रोजगार क्षमता में सुधार और बेहतर आजीविका के अवसर पैदा करने में सहायता करना है।

क) कौशल एवं प्रशिक्षण घटक

ख) महिला नेतृत्व और उद्यमिता घटक

ग) शिक्षा सहायता घटक (स्कूल छोड़ने वालों के लिए)

इसके अलावा, इस योजना का लक्ष्य लाभार्थियों के लिए ऋण और बाजार संपर्क को बढ़ावा देना है।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) एनएमडीएफसी संबंधित राज्य सरकार/संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन और केनरा बैंक द्वारा नामित राज्य चौनलाइजिंग एजेंसियों (एससीए) के माध्यम से सावधि ऋण, शिक्षा ऋण, विरासत योजना और सूक्ष्म वित्त योजना की अपनी योजनाओं के तहत स्वरोजगार आय सृजन गतिविधियों के लिए अधिसूचित अल्पसंख्यकों के बीच पिछड़े वर्गोंष्को रियायती ऋण प्रदान करता है।
3. बुनियादी ढांचा विकास योजना

प) प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके)

विशेष योजनाएँ
(प) जियो पारसी भारत में पारसियों की जनसंख्या में गिरावट रोकने की योजना।

(पप) कौमी वक्फ बोर्ड तरक्कियाती योजना (क्यूडब्ल्यूबीटीएस) और शहरी वक्फ संपत्ति विकास योजना (एसडब्ल्यूएसवीवाई)

इन योजनाओं का विवरण मंत्रालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है

सभी योजनाओं ने उच्च स्तरीय कौशल प्राप्ति, आजीविका के बेहतर अवसर, उच्च रोजगार क्षमता, बेहतर बुनियादी ढांचे तक पहुंच, बेहतर स्वास्थ्य और अल्पसंख्यक समुदायों के समग्र कल्याण में योगदान दिया है।

जियो पारसी योजना 2013-14 में शुरू की गई थी जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक प्रोटोकॉल और संरचित हस्तक्षेप अपनाकर पारसी आबादी की घटती प्रवृत्ति को उलटना, उनकी आबादी को स्थिर करना और भारत में पारसियों की आबादी को बढ़ाना था। इस योजना के तीन घटक हैं

प) चिकित्सा सहायता – मानक चिकित्सा प्रोटोकॉल के तहत चिकित्सा उपचार के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना;

पप) वकालत – प्रजनन संबंधी समस्याओं वाले दम्पतियों को परामर्श देने तथा कार्यशालाओं सहित प्रचार-प्रसार की व्यवस्था; तथा

पपप) समुदाय का स्वास्थ्य विभाग पारसी दम्पतियों को बच्चों की देखभाल तथा आश्रित वृद्धों की सहायता के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करेगा;

योजना के अंतर्गत सहायता, संबंधित राज्य सरकारों द्वारा बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और अन्य सत्यापन के बाद प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) मोड के माध्यम से लाभार्थियों को जारी की जा रही है। योजना के दिशा-निर्देश मंत्रालय की वेबसाइट (ूूू.उपदवतपजलंििंपते.हवअ.पद) पर उपलब्ध हैं।

इस योजना में मंत्रालय और राज्य सरकारों द्वारा नियमित निगरानी तथा योजना के लाभों और परिणामों का आकलन करने के लिए समवर्ती मूल्यांकन का प्रावधान है।

यह जानकारी केन्द्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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