शत्रु संपत्तियों की बिक्री से सरकार को 2,930 करोड़ की कमाई
एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। केंद्र सरकार ने शत्रु देशों से जुड़ी संपत्तियों के मुद्रीकरण की प्रक्रिया को तेज करते हुए अब तक 2,930 करोड़ रुपये मूल्य की चल एवं अचल शत्रु संपत्तियों की बिक्री कर दी है। गृह राज्य मंत्री बंदी संजय कुमार ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी दी।
शत्रु संपत्तियों का निपटान शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 तथा उससे संबंधित नियमों और दिशा-निर्देशों के तहत किया जाता है। इसमें शत्रु संपत्ति नियम, 2015; निपटान दिशानिर्देश, 2018; शेयर बिक्री प्रक्रिया आदेश, 2019; और अचल संपत्तियों के निपटान से जुड़े आदेश, 2020 शामिल हैं।
सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संपत्तियों की बिक्री से पहले मूल्यांकन की सख्त प्रक्रिया लागू की है। संबंधित जिले के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति संपत्तियों का आकलन करती है, जबकि एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की संपत्तियों का बाजार मूल्य सूचीबद्ध मूल्यांककों से तय कराया जाता है। इसके बाद रिपोर्ट शत्रु संपदा संरक्षक (CEPI) द्वारा निपटान समिति के समक्ष रखी जाती है, जो केंद्र सरकार को अंतिम सिफारिश भेजती है।
मुद्रीकरण को गति देने के लिए सरकार ने कई अहम कदम उठाए हैं। ई-नीलामी में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु बयाना राशि (EMD) को 10 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है और भुगतान की समय-सीमा 21 दिनों से बढ़ाकर 120 दिन कर दी गई है। यदि तीन बार नीलामी के बाद भी बोली नहीं लगती, तो आरक्षित मूल्य में 10 प्रतिशत की कटौती कर दोबारा नीलामी की जाती है।
ग्रामीण क्षेत्रों में एक करोड़ रुपये से कम और शहरी क्षेत्रों में पांच करोड़ रुपये से कम मूल्य की संपत्तियों को कब्जाधारकों को खरीद का प्रस्ताव देने की व्यवस्था भी की गई है। साथ ही, जिला प्रशासन से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों तक अधिकारियों की नियुक्ति और नीलामी के प्रचार-प्रसार के लिए मानक संचालन प्रक्रिया लागू की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन कदमों से न केवल निष्क्रिय पड़ी संपत्तियों का बेहतर उपयोग संभव होगा, बल्कि सरकारी राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
AnyTime News
