मानेसर में अधिकारियों को मिला आर्थिक कानूनों का गहन पाठ

कॉर्पोरेट कानून की समझ बढ़ाने को IES-ITS अधिकारियों का विशेष प्रशिक्षण

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। भारतीय आर्थिक सेवा (IES) और भारतीय व्यापार सेवा (ITS) के अधिकारियों की नीतिगत एवं नियामकीय समझ को मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय कॉर्पोरेट कार्य संस्थान (IICA) द्वारा 2 से 6 फरवरी 2026 तक आईएमटी मानेसर परिसर में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में 21 अधिकारियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन IICA के महानिदेशक एवं सीईओ ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने किया। उन्होंने कहा कि भारत की तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था में कॉर्पोरेट कानून, प्रतिस्पर्धा कानून और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। उन्होंने विश्वास-आधारित नियमन (Trust-based Regulation) की अवधारणा पर जोर देते हुए अधिकारियों को कॉर्पोरेट मामलों से जुड़े विशिष्ट क्षेत्रों पर परियोजनाएं लेने के लिए प्रोत्साहित किया।

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय बजट 2026 की प्रमुख घोषणाओं—विशेषकर एमएसएमई समर्थन और प्रस्तावित “कॉर्पोरेट मित्र” योजना—का भी उल्लेख किया गया, जिसे व्यापारिक माहौल को और अधिक सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

प्रशिक्षण की रूपरेखा अधिकारियों की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई थी, ताकि उन्हें कंपनी अधिनियम, प्रतिस्पर्धा कानून, कॉर्पोरेट वित्त और दिवाला कानून जैसे विषयों पर व्यावहारिक जानकारी मिल सके। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को कंपनी प्रबंधन, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की शक्तियां, नियामकीय शासन, प्रतिस्पर्धा-विरोधी समझौते, प्रभुत्व के दुरुपयोग, ऋण और चूक, डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण तथा कॉर्पोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया।

कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में भाग लिया, जिनमें पूर्व CCI अध्यक्ष धनेंद्र कुमार, IBBI के पूर्व सदस्य सुधाकर शुक्ला, डॉ. एम.एस. साहू, जी.पी. मदान और समीर गांधी जैसे नाम शामिल रहे। धनेंद्र कुमार ने MRTP अधिनियम से आधुनिक प्रतिस्पर्धा कानून तक की यात्रा का उल्लेख करते हुए संस्थान-निर्माण के अपने अनुभव साझा किए, जबकि तकनीकी सत्रों में कॉर्पोरेट शासन और एंटीट्रस्ट कानून के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा हुई।

सुधाकर शुक्ला ने Ease of Doing Business के तीन प्रमुख स्तंभ—प्रवेश, संचालन और निर्गमन की स्वतंत्रता—पर प्रकाश डालते हुए इन्हें कंपनी अधिनियम 2013, प्रतिस्पर्धा अधिनियम 2002 और IBC 2016 से जोड़ा।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम अधिकारियों को न केवल नीतिगत चुनौतियों को समझने में मदद करेगा, बल्कि भारत के कॉर्पोरेट शासन ढांचे को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी और निवेश-अनुकूल बनाने में भी सहायक साबित होगा। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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