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मोदी योगी सरकार की जीरो टोलरेंस पॉलिसी को मुंह चिढ़ा रहे हैं यूनानी पद्धति के कार्यवाहक निदेशक व कनिष्ठ लिपिक

पूजा श्रीवास्तव लखनऊ ।                                                                  उत्तर प्रदेश आयुष विभाग के यूनानी पद्धति निदेशालय के कार्यवाहक निदेशक प्रोफेसर ज़माल अख्तर और कनिष्ठ लिपिक मोहम्मद इकबाल ने मोदी-योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस पॉलिसी, उत्तर प्रदेश ट्रांसफर पॉलिसी समैत नैतिक मूल्यों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यें आरोप शिकायतकर्ता मोहित तिवारी ने लगायें ।         मोहित तिवारी ने कहां कि वजह साफ है सेक्शन अफसर, माननीय मंत्री दयालु जी मिश्रा के भांजे निजी सचिव, अनुसचिव और विशेष सचिव का विशेष कृपा और नेक्सस की वजह से इन पर किसी भी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होती है। गौरतलब है कि निर्देशक और कनिष्ठ लिपिक द्वारा लगातार आर्थिक भ्रष्टाचार के माध्यम से शोध एवं विकास के कार्यों के साथ-साथ दवा एवं अन्य खरीद अपने अपनों के साथ कराई जा रहे हैं जिसमें जमकर बंदर बांट हो रहीं हैं। अस्पतालों में आवश्यक दावों की सूची से कीमती दवाएं गायब है जबकि दूसरी स्तर की दवाएं मनचाहा कीमत पर खरीदी जाती हैं वहीं दवाएं उपलब्ध है।                                                       प्रार्थी ने कहा कि इसी तरह रिसर्च एवं डेवलपमेन्ट के मामले में विधायक रविदास मेहरोत्रा ने प्रमुख सचिव विधानसभा को शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी जिसको आज तक यूनानी पद्धति के सेक्शन अफसर, निजी सचिव अनुसचिव और विशेष सचिव तक दबाए बैठे हैं । शिकायतकर्ता ने कहा कि मौजूदा समय सरकार की ट्रांसफर नीति लागू है जिस पर निदेशक व कनिष्क लिपिक मिलकर अधिकारी और कर्मचारियों को ट्रांसफर का लालच और दबाव बनाकर भारी मात्रा धन की उगाई कर रहे हैं जिस पर कोई भी अंकुश नहीं लग पा रहा है साथ ही कनिष्ठ लिपिक मोहम्मद इकबाल 30 सालों से ज्यादा चिपका हुआ है।                                       इस संबंध में प्रार्थी मोहित तिवारी ने बताया कि देश के सर्वोच्च न्यायालय, राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश, राज्यपाल उत्तर प्रदेश, मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, व अन्य विभागों के प्रमुख सचिवों के साथ-साथ आयुष विभाग के प्रमुख सचिव तक शिकायत भेजी है साथ ही उनके अनुस्मारक पत्र भी भेजे हैं जिस पर कार्रवाई अभी तक वांछित है।                                                           प्रार्थी करवाई न होने की वजह से डिप्रेशन और फ्रस्ट्रेशन का शिकार हो रहा है ,प्रार्थी को देश के संविधान और न्यायपालिका पर पूरी तरह से विश्वास है।

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