सहारा हॉस्पिटल मे सर्जरी द्वारा मरीज का हाथ कटने से बचाया सहारा हॉस्पिटल के प्लास्टिक सर्जन द्वारा 

सहारा हॉस्पिटल मे सर्जरी द्वारा मरीज का हाथ कटने से बचाया सहारा हॉस्पिटल के प्लास्टिक सर्जन द्वारा

कई हास्पिटल ने हाथ काटने का ही बताया था एकमात्र विकल्प

 

 

29 वर्षीय प्रतापगढ़ के रहने वाले अफसर अंसारी शादी के समारोह में शामिल होने गए थे जहां पर वह कांच की खिड़की के पास खड़े थे और एकदम से कांच टूट करके सीधे उनकी तरफ गिरा और वह सन्तुलन नहीं बना पाए, कांच पर गिर जाने से उनका हाथ कट गया तब उन्होंने आनन फानन में उन्हें सरकारी अस्पताल में दिखाया जहां पर मरीज को बताया गया कि उसका हाथ काटना पड़ सकता है। फिर उनके जानने वाले उन्हें लखनऊ लेकर आए जहां पर पुनः उन्हें सरकारी अस्पताल में दिखाया गया और डॉक्टर ने यहां भी उन्के हाथ काटने की ही बात कही। केजीएमयू के पर्चे और सी टी एंजियोग्राफी की रिपोर्ट के अनुसार मरीज की कोहनी के नीचे खून ले जाने वाली दोनों नलियां ( रेडियल और‌ अलवर आर्टरी) कटी हुई थी और‌ चोट लगने के बाद 12 घंटे से अधिक का समय हो गया था।

साथ तब एक उसके परिचित की सलाह पर उसे सहारा हॉस्पिटल लाया गया जहां पर उन्हें सहारा हॉस्पिटल के बहुत ही अनुभवी चिकित्सक प्लास्टिक सर्जन डॉक्टर अनुराग पाण्डेय जी से परामर्श मिला। सहारा हॉस्पिटल में मरीज 36 घंटे के बाद आया फिर भी उनका हाथ काला नहीं पड़ा था इसलिए उसे अविलंब सर्जरी के लिए ओ टी में लिया गया और कटी हुई सारी नसों (आर्टरी, नर्व्स टेंडन और मसल्स) को सफलतापूर्वक जोड़ा गया।

 

सहारा हॉस्पिटल में जाने से पूर्व मरीज ने अन्य प्राइवेट हॉस्पिटल में भी सम्पर्क किया जहां मरीज को यह बताया गया कि ऑपरेशन के दौरान मरीज का हाथ बचाने की कोशिश करेंगे परन्तु हाथ बच पाने की सम्भावना बहुत कम है और साथ ही खर्चा भी लगभग पांच से छह लाख तक बताया गया था।

ज्ञात हो कि सहारा हॉस्पिटल लखनऊ में उनका न केवल हाथ कटने से बचाया गया बल्कि लगभग आधे से भी कम दरों पर पर सफलतापूर्वक ऑपरेशन भी किया गया। मरीज का भाई व उसके परिवारजन इतने कम खर्चे में इलाज पाकर और सफल आपरेशन से बेहद सन्तुष्ट थे। यहां तक कि भविष्य में मरीज अपने हाथ से सारे काम करने में सक्षम होगा।

 

इस प्रकरण के माध्यम से डॉक्टर अनुराग का यह संदेश है कि सामान्यतः यह माना जाता है कि हाथ या पैर की खून की मुख्य नसों के कटने के बाद उन्हें 6 घंटे के अंदर जोड़ना चाहिए जैसा कि इस मरीज को दूसरे हास्पिटल में बताया गया कि हाथ काटना पड़ेगा लेकिन कोशिश करने पर न सिर्फ हाथ को कटने से बचाया गया बल्कि कुछ महीने बाद वो अपने हाथ से सारे काम भी कर पायेगा।

 

सहारा हॉस्पिटल के वरिष्ठ सलाहकार श्री अनिल विक्रम सिंह जी ने बताया कि हमारे माननीय अभिभावक “सहाराश्री” जी ने विश्व स्तरीय सहारा हॉस्पिटल का निर्माण करवाया है जहां हर वर्ग की जरूरत के हिसाब से बेहद किफायती दरों पर इलाज उपलब्ध है। श्री सिंह ने बताया कि लोगों को बड़े हास्पिटल को देखकर लगता है कि यह महंगा ही होगा जबकि यहां पर उचित सेवाएं, इलाज उचित मूल्य पर उपलब्ध है।

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