खादी कारीगरों को आर्थिक ताकत देने में जुटा केवीआईसी, योजनाओं से बढ़ेगा रोजगार और बाजार

वित्तीय सहायता, ई-कॉमर्स और ब्रांड प्रमोशन के जरिए खादी को वैश्विक पहचान दिलाने की तैयारी

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क।। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय के तहत कार्यरत वैधानिक संस्था खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) देशभर के खादी संस्थानों और कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए कई योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। सरकार का लक्ष्य न केवल खादी उत्पादन को बढ़ावा देना है, बल्कि कारीगरों की आय में सुधार करते हुए रोजगार के नए अवसर भी सृजित करना है।

केवीआईसी द्वारा खादी संस्थानों के प्रदर्शन—जैसे उत्पादन, बिक्री और रोजगार—की नियमित निगरानी की जाती है ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंच सके। इसी क्रम में संशोधित बाजार विकास सहायता (MDMA) योजना के तहत बिक्री केंद्रों के आधुनिकीकरण, कंप्यूटरीकरण, तकनीकी उन्नयन और मूल्यवर्धन के लिए वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।

वहीं ब्याज सब्सिडी पात्रता प्रमाण पत्र (ISEC) योजना के अंतर्गत पात्र संस्थानों को पूंजीगत निवेश और कार्यशील पूंजी के लिए मात्र 4% वार्षिक रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है। इससे छोटे खादी संस्थानों को आर्थिक मजबूती मिलने की उम्मीद है।

कारीगरों के कार्यस्थल को बेहतर बनाने के उद्देश्य से वर्कशेड योजना भी लागू की गई है, जिसके तहत कताई-बुनाई के लिए आधुनिक कार्यस्थल, कच्चे माल के भंडारण और उपकरणों की सुविधा प्रदान की जाती है। इसके अलावा, कमजोर या बीमार खादी संस्थानों को पुनर्जीवित करने के लिए आवश्यकता-आधारित बुनियादी ढांचा सहायता भी दी जा रही है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।

खादी उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाने पर विशेष जोर देते हुए केवीआईसी ने अपना ई-कॉमर्स पोर्टल khadiindia.gov.in संचालित किया है, जिससे देशभर के उपभोक्ता आसानी से खादी उत्पाद खरीद सकें। आयोग राष्ट्रीय से लेकर जिला स्तर तक प्रदर्शनियों का आयोजन करता है और संस्थानों को अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे खादी को वैश्विक बाजार मिल सके।

‘खादी महोत्सव’ जैसे आयोजनों के माध्यम से विशेष बिक्री अभियान चलाए जाते हैं, जबकि आईआईटी और आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में आयोजित कार्यक्रमों को प्रायोजित कर ब्रांड “खादी इंडिया” को नई पहचान देने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार लिंकेज मजबूत होने, डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ाव और ब्रांड प्रमोशन के चलते खादी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति दे सकता है। यदि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा, तो खादी न केवल आत्मनिर्भर भारत अभियान को मजबूती देगी बल्कि लाखों कारीगरों के जीवन स्तर में भी सकारात्मक बदलाव ला सकती है।

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