आरबीआई ने रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा, अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम


एमपीसी की सर्वसम्मति—महंगाई नियंत्रण में, विकास दर मजबूत; न्यूट्रल रुख जारी

एनीटाइम न्यूज नेटवर्क। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 4 से 6 फरवरी 2026 तक आयोजित अपनी 59वीं बैठक में प्रमुख नीतिगत दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला किया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया। इसके साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) दर 5.00 प्रतिशत और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) व बैंक रेट 5.50 प्रतिशत पर कायम रहेंगे। समिति ने अपनी ‘न्यूट्रल’ नीति भी जारी रखने का फैसला किया है।

एमपीसी के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था ने 2025 में अपेक्षा से बेहतर लचीलापन दिखाया है, हालांकि भू-राजनीतिक तनाव, वित्तीय बाजारों में अस्थिरता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की अनिश्चितताएं अभी भी जोखिम बनी हुई हैं। इसके बावजूद भारत की घरेलू आर्थिक स्थिति मजबूत नजर आ रही है।

आरबीआई के प्रथम अग्रिम अनुमान (FAE) के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस वृद्धि में निजी खपत और स्थिर निवेश का अहम योगदान रहा है, जबकि आयात बढ़ने से बाहरी मांग पर दबाव बना हुआ है। आपूर्ति पक्ष में सेवा क्षेत्र की मजबूती, कृषि क्षेत्र की स्थिरता और विनिर्माण गतिविधियों में सुधार से सकल मूल्य वर्धन (GVA) में 7.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज होने की उम्मीद है।

आगे की संभावनाओं को देखते हुए आरबीआई ने संकेत दिया है कि सेवा क्षेत्र की तेजी, स्वस्थ रबी फसल, बेहतर वित्तीय परिस्थितियां और सरकारी पूंजीगत खर्च निवेश गतिविधियों को गति देते रहेंगे। साथ ही अमेरिका, यूरोपीय संघ, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ संभावित व्यापार समझौते निर्यात को मजबूत कर सकते हैं। हालांकि वैश्विक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और मौसम संबंधी जोखिम चुनौतियां बने रहेंगे।

महंगाई के मोर्चे पर भी स्थिति नियंत्रण में बताई गई है। नवंबर में 0.7 प्रतिशत और दिसंबर 2025 में 1.3 प्रतिशत रहने वाली खुदरा महंगाई दर अपेक्षाकृत कम रही। खाद्य कीमतों में गिरावट और ईंधन समूह में मध्यम वृद्धि ने राहत दी है। वर्ष 2025-26 के लिए सीपीआई महंगाई 2.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि 2026-27 की पहली दो तिमाहियों में यह क्रमशः 4.0 और 4.2 प्रतिशत रह सकती है।

एमपीसी का मानना है कि मौजूदा नीतिगत दर आर्थिक संतुलन बनाए रखने के लिए उपयुक्त है। हालांकि समिति के सदस्य प्रो. राम सिंह ने न्यूट्रल रुख के बजाय ‘अकोमोडेटिव’ नीति अपनाने का सुझाव दिया, लेकिन बाकी सदस्यों ने मौजूदा रुख को ही सही माना।

एमपीसी की बैठक के मिनट्स 20 फरवरी 2026 को जारी किए जाएंगे, जबकि अगली बैठक 6 से 8 अप्रैल 2026 के बीच प्रस्तावित है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिर ब्याज दरें निवेशकों का भरोसा बढ़ाएंगी और आर्थिक विकास को निरंतर समर्थन देंगी।

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